तुमसे मेरा रिश्ता क्या है क्या तुम यह कह पाओगे रूह सा जो है बिच हमारे कोई नाम उसे दे पाओगे कुछ भी नहीं हु मैं सच है पर क्या मुझे ठुकरा पाओगे मुझसे न दर्द नाही सुकून है पर क्या यादो से हटा पाओगे मैं क्या हु तुम क्या हो, क्या तुम कभी कह पाओगे ?" ये कैसा इश्क़ है जहा मोहब्बत बसी है पर उसे जाहिर करने की इच्छा नहीं ? जहा प्यार का बीज तो है पर उसके अंकुरण की कोई कोशिश नहीं। ये एक ऐसी कहानी है जहा शादी तो कॉन्ट्रैक्ट की होगी पर प्यार हर चीज पलट देगा। कॉन्ट्रैक्ट मैरेज को एक सच्चे रिश्ते के बंधन में बदल देगा।
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