कयामत की रात

दिसंबर की कड़ाके की ठंड थी,आधी रात का समय था , वो एक सुनसान इलाका था, हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था, उस सुनसान इलाके की एक सुनसान सड़क पर एक बस तेज़ी से चली जा रही थी, दूर दूर तक सड़क पर कोई नज़र नहीं आ रहा था, बस के चलने की आवाज़ उस सन्नाटे मे अजीब सा शोर पैदा कर रही थी , बस के अंदर कुछ ही लोग सवार थे,उसी बस मे एक हितेन नाम का व्यक्ति भी था, हितेन दिल्ली का रहने वाला था, जो अपने दोस्त की शादी अटेंड करने के लिए मसूरी जा रहा था, मगर मसूरी से सिर्फ बीस किलोमीटर की दूरी पर ही अचानक वो बस चलते चलते रुक गई, पहाड़ी इलाका था, हाड़ कंपा देने वाली सांय सांय की आवाज़ से तेज़ शीत लहर चल रही थी,बस काफी देर तक ख़डी रही ,हितेन का थकन के मारे बुरा हाल था, वो बस मसूरी पहुँच कर सोने के लिए गर्म गर्म बिस्तर चाहता था,उस ने झल्ला कर ड्राइवर से पूछा, हितेन -" क्या हुआ बस क्यों रोक दी" ड्राइवर -" लगता है बस मे कुछ खराब हो गई है साहब,सुबह तक ठीक हो पाएगी ,यहाँ दूर दूर तक सिर्फ घना जंगल है, कोई मेकेनिक नहीं मिलेगा " - ड्राइवर की बात सुन कर हितेन का मूड खराब हो गया, वो ग़ुस्से मे ड्राइवर से बोला, - हितेन-"पर मैं सुबह तक यहां नहीं रुक सकता, मसूरी अब यहां से सिर्फ दस किलोमीटर दूर है,मैं पैदल ही चला जाऊंगा" -हितेन की बात सुनकर बस ड्राइवर ने सहमी हुई आवाज़ में कहा, - ड्राइवर -"सर्दी बहुत ज़्यादा है साहब, ज़्यादा दूर तक चल नहीं पाओगे तुम , कहते है ये इलाका बहुत खतरनाक है , यहां अजीब अजीब घटनाए होती रहती है ,इसीलिए रात में यहां से कोई नहीं गुजरता,बेहतर होगा आज रात तुम यहीं बस में गुजार लो" बस ड्राइवर की बात सुनकर बस मे सवार बाकी लोग हसने लगे, ड्राइवर की बात सुन कर हितेन भी अपनी हंसी रोक नहीं पाया, वो हँसते हुए ड्राइवर से बोला, हितेन -" खतरनाक, फिर आप खुद को बचाकर रखिए" - हितेन बस मे मौजूद लोगो से बोला, हितेन -"तुम मे से कोई मेरे साथ चलना चाहे तो चल सकता है " हितेन की बात पर बस से पांच लोग हितेन के साथ बस से उतर गए , बस ड्राइवर सहमे हुए अंदाज़ मे तेज़ स्वर मे बोला, ड्राइवर -" तुम्हारा भी वही हाल होगा साहब जो बाकी सबका हुआ तुम्हे कोई नहीं बचा सकता, उस रास्ते पर से आज तक कोई बचकर नहीं आया अभी भी वक्त है वापस आ जाओ" मगर हितेन ने ड्राइवर की बात को अनसुना कर दिया हितेन और वो पांच यात्री उस अंधेरी सड़क पर चलने लगे, अभी वो सिर्फ डेढ़ किलो मीटर ही चले थे कि उनकी ठंड के मारे हालत खराब हो गई,तेज़ कड़ाके की ठंड पथरीला रास्ता भूख और भारी समान की वजह से वो अब नहीं चल पा रहे थे, बस से उतरने पर जैसे उनको पछतावा होने लगा था, तभी उस सन्नाटे मे घोड़ो की आवाज़ से वो सब चौँक गए,उन सब ने देखा कि एक तांगे वाला बड़ी फुर्ती से उन सब के पास आ कर रुक गया, तांगे वाले ने उन सब की ओर देख कर कहा, तांगेवाला -" इस वीराने में कहा घूम रहे हो तुम लोग, ये जगह बेहद ही खतरनाक है,यहां पास में ही एक ऐसी जगह है जहां आपको खाने और रात रुकने की जगह मिल सकती है" हितेन उस तांगे वाले की ओर गौर से देखते हुए बोला, हितेन -"लेकिन हमें तो यहाँ सन्नाटे के अलावा कुछ नहीं दिखायी दे रहा" तांगे वाला -"आप सब टूरिस्ट लगते हो, मैं तो बस आप लोगो की मदद करना चाहता हूं, बाकी आप की मर्ज़ी " हितेन -" थैंक यू, हमारी मदद करने के लिए, वरना हमको तो लग रहा था, ये ठंड आज हमारी जान ही लेकर जाएगी " तांगे वाले वाले के होंठो पर एक रहस्यमई मुस्कुराहट आ गई,सब तांगे में बैठ गए, तांगे वाले ने अपने घोड़े दौड़ा दिए,वो तांगा पथरीले रास्ते से होकर गुज़रने लगा, हलके हलके कोहरे की धुंध माहौल को और डरावना बना रही थी, उस सन्नाटे मे तांगे की आवाज़ जैसे उन सबका दिल दहला रही थी। तभी वो तांगा एक छोटे से कच्चे रास्ते से होकर गुजरने लगा, जहाँ चारो ओर घना जंगल था जो रात में बेहद डरावना लग रहा था, जंगल से आती जंगली जानवरो की आवाज़े उन सब को अंदर तक दहला दे रही थी।हितेन ने तांगे वाले से पूछा, " ये कोनसा रास्ता है काका?आप हम सबको कहा ले जा रहे है " -तांगे वाले ने रहस्यमयी अंदाज़ में कहा, " बस हम पहुंचने ही वाले है । ये रास्ता ख़तम होते ही हम अपनी मंज़िल पर पहुंच जाएंगे" थोड़ी ही देर में वो कच्ची पगडंडी वाला रास्ता ख़तम हो गया अचानक एक जगह तांगे वाला तांगा रोकते हुए बोला, तांगे वाला -"लीजिए आ गई आपकी मंज़िल " हितेन और बाकी लोग तांगे से उतर गए,और तांगे वाला वहां से एक रहस्यमई मुस्कान ले कर बड़ी फुर्ती से चला गया, उन सब ने देखा, सामने ही छह झोंपड़ीयां बड़े ही अजीब आकर की बनी हुई थी,जिन के बाहर कुछ चारपाईयां पड़ी हुई थी, और वहां पर आग भी जल रही थी,ये देख कर हितेन सोच मे पढ़ गया, उसे वहां कुछ अजीब सा महसूस होने लगा, हितेन के साथ साथ बाकी लोग भी वहां हैरानी से उन झोपडीयों को देख रहे थे, हितेन उन सब से कुछ बोलने ही वाला था कि ,तभी कुछ स्त्रियां उन झोपडीयों से निकल कर बाहर आ गई उनमें से एक स्त्री ने उन सब की ओर देख कर कहा, " वेलकम आप लोग बैठिए, ये जगह खास टूरिस्ट के लिए ही बनाई गयी है, आप लोग इस तरह से हैरान ना हो, बस रात का आनंद उठायें " तब ही अचानक उन सब के कानो मे घुंघरू की तेज़ आवाज़ आने लगी, वो घुंघरू की आवाज़ कोई आम सी नहीं थी, कुछ तो जादू था उसमे, वो सब उस आवाज़ में जैसे खो से गए,, तभी घुँघरू की आवाज़े और तेज़ हो गई, और एक बेहद सुंदर स्त्री एक झोंपड़ी से निकल कर उन सब के सामने आ कर ख़डी हो गयी,ये वही स्त्री थी जिसके घूंघरू की आवाज़ सबको पागल बना रही थी,उस स्त्री को देख कर उन सब के होश उड़ गए। उसकी खूबसूरत बड़ी बड़ी हरी आंखे, लंबे बाल, खूबसूरत चेहरा, वो कोई अप्सरा से कम नहीं लग रही थीं। हितेन ने आज तक इतनी खूबसूरत स्त्री नहीं देखी थी, हितेन सम्मोहित अवस्था मे उस लडकी की तरफ बढ़ने लगा, जैसे वो कोई अनदेखी ताक़त उसको अपनी तरफ खींच रही थी। हितेन उस लडकी के पास जाकर सम्मोहित अवस्था मे बोला , " तुम्हारा नाम क्या है " उस स्त्री ने सुरीली आवाज़ में हितेन से कहा, लड़की -"मुझे चंद्र लेखा कहते हैँ " इतना कहकर चन्द्रलेखा ने हितेन को उस झोंपड़ी मे आने का इशारा किया , हितेन किसी रोबोट की तरह उसके पीछे पीछे चल दिया, बाकी सब ही लोगो का भी यही हॉल था जो हितेन का था वो सब के सब सम्मोहित अवस्था मे उन स्त्रियों के साथ झोपडी के अंदर चले गए , झोपडी मे जाने वाला एक युवक जिसका नाम भेरव था, झोपडी के अंदर जाते ही उन मे से एक स्त्री ने भैरव के सीने पर अपना हाथ रख दिया, भैरव ने मदहोश होकर अपनी आंखे बन्द कर ली, अचानक उस स्त्री की आंखे कांच की तरह चमकने लगी ,और देखते ही देखते उस के पैर उल्टे हो गए, लेकिन सम्मोहित अवस्था मे भैरव ये नहीं देख पाया,अचानक उस स्त्री ने अपने लंबे लंबे नाखून भैरव के सीने में गाड़ दिए, एक ज़ोरदार चीख भैरव के मुंह से निकल गई, उस स्त्री ने भेरव के सीने से उसका दिल को निकाल लिया कुछ ही सेकंड में भेरव की लाश ज़मीन पर पड़ी थी, वो स्त्री अपने हाथ में लिए दिल को देखकर ज़ोर ज़ोर से हसते हुए डरावनी आवाज़ में बोली,,, " मिल गई आज की खुराक, अब इससे मेरी भूख मिटेगी, बाकी सबका भी वही होगा जो इस का हुआ" उस स्त्री ने भेरव की लाश को उठाकर एक ही झटके में बाहर फेंक दिया, और कुछ ही सेकंड मे वो दिल उसकी खुराक बन चुका था, उसका मुंह खून से सना हुआ था, कुछ ही देर में वो जंगल का घना इलाका उन लोगों की चीखों से गूंज उठा वो सारी स्त्रियां आदमखोर डायने थी, जो एक एक करके बाकी सारे लोगो के दिल निकाल कर खा चुकी थी, हितेन चंद्रलेखा के हुस्न जाल में खोया हुआ चंद्र लेखा से लिपटा हुआ था, अचानक लोगो की चीखो से हितेन का सममोहन टूट गया, खुद को उस स्त्री के साथ उस झोपड़ी के अंदर देखकर हितेन बुरी तरह से हैरान हो गया,अचानक हितेन की नजर उस स्त्री के पैरों पर चली गई जिनको देखकर हितेन का चेहरा पसीने से भर गया, उसके पैर उल्टे थे,एक ज़ोरदार चीख हितेन के मुंह से निकल गयी, अचानक से चंद्र लेखा की खूबसूरती ढलने लगी, जवान दिखने वाली चंद्र लेखा बेहद बूड़ी और भयानक हो गयी, जिसे देखकर हितेन की रूह तक कांप गई, हितेन ने हकलाती हुई आवाज़ में कहा, " कौन कौन हो तुम और और मुझ मुझसे क्या चाहती हो" चंद्र लेखा ने बेहद फुर्ती से हितेन का गला पकड़ लिया और अपनी गरदन टेढ़ी करते हुए बोली , " मुझे तेरा दिल चाहिए, यही तो मेरी खुराक है,लोगो के दिल खाकर मैं ज़िंदा और जवान रहती हूं,तुम जैसे मुसाफिर ही तो हमारा शिकार होते है" अचानक से हितेन ने उसे ज़ोर से धक्का दिया और तेजी से भागता हुआ बाहर की ओर आ गया,मगर बाहर का नजारा देख कर उसकी आंखें दहशत से फटी की फटी रह गई उसने देखा कि अब वहां पर कोई झोपड़ीयां मौजूद नहीं थीं,बल्कि बहुत पुराने टूटे हुए खंडहर थे,उस जंगल में बेहद खौफनाक लग रहे थे,थे देखते ही देखते उस खंडहर में से बेहद खतरनाक चेहरे वाली स्त्रियां निकलकर हितेन के सामने आकर खड़ी हो गयीं,उनकी आंखें रात के अंधेरे में चमक रही थी,तभी हितेन की नजरे सामने झाड़ियों पर पड़ी उसने देखा कि उसके साथ जितने भी लोग मौजूद थे उन सब की लाशें खून से लथपथ जमीन पर पड़ी हुई थी, उन के सीने से दिल गायब थे, हितेन पूरी ताकत लगा कर वहां से भागने लगा,उन भयानक स्त्रियों की हंसने की आवाजे हितेन के कानों का लगातार पीछा कर रही थी, तभी अचानक हितेन का शरीर किसी से टकरा गया,हितेन जमीन पर गिर पड़ा, उस के कानों में एक जाना पहचाना स्वर टकराया, "कहां भागे जा रहे हो साहब " - हितेन उस आवाज को पहचानता था वह आवाज़ किसी और की नहीं बल्कि उसी तांगे वाले की थी हितेन बेहद फुर्ती से उठ कर खड़ा हो गया उसने देखा कि उस तांगे वाले की शक्ल बेहद भयानक थी,वह अपनी लाल आंखों से हितेन को घूरे जा रहा था,हितेन फिर से अपनी पूरी ताकत लगाकर वहां से भागने लगा, हितेन को नहीं मालूम था कि वो कहां भागे जा रहा है वह बस उस भयानक जंगल से दूर निकलना चाहता था, कड़कड़ाती हुई ठंड में हितेन का शरीर पसीने से भीगा हुआ था,तभी हितेन के कानों में किसी बस का हॉर्न सुनाई दिया अचानक हितेन को अपने आगे सब कुछ घूमता हुआ सा महसूस हुआ हितेन बेहोश कर गिर पड़ा, कुछ घंटो बाद हितेन की आंख उसी बस में खुली जिस बस में वह रात में सवार था,उसने देखा कि उस बस के मुसाफिर उसे घेरे हुए बैठे हुए थे,हितेन ने कंपकंपाते हुए पूरी घटना ड्राइवर को बता दी , ड्राइवर हितेन की ओर देखकर भारी आवाज में बोला, - "मैंने तुमसे मना किया था साहब,लेकिन तुमने मेरी बात नहीं मानी,तुम्हारी वजह से और भी मुसाफिरों को अपनी जान गंवानी पड़ी, तुम शहर के लोग चार किताबें क्या पढ़ लेते हो अपने आप को पता नहीं क्या समझने लगते हो ,यह दुनिया रहस्यों से भरी हुई है,मगर तुम लोग सिर्फ विज्ञान के तर्क को ही सही समझते हो,जबकि सच तो यह है कि विज्ञान जहां से खत्म होता है इन ताकतों की शुरूआत वहीं से होती है " "लेकिन वह सब क्या था कौन थी वह भयानक चेहरे वाली स्त्रियां" ड्राइवर ने जो हितेन को बताया उसे सुन कर हितेन के खून मे दहशत की लहर दौड़ गयी, उस ने बताया कि वो स्त्रियां भयानक आदमखोर डायने थीं ,कहते हैं कि अंग्रेजों के समय में यहां पर चंद्रलेखा नाम की एक बेहद सुंदर स्त्री रहा करती थी,जिसके ना जाने कितने अंग्रेज अफसरों के साथ नाजायज संबंध थे,उसके साथ उसकी पांच दासियाँ भी उसी का काम करती थीं, चंद्रलेखा जादू टोना करने में माहिर थी,उस जमाने में यहां पर बस्ती आबाद हुआ करती थी,उस का एक बफादार साथी तांगे वाला हुआ करता था,कहते हैं कि चंद्रलेखा अपने साथी द्वारा जिसको भी चाहती बस्ती से उठवा कर उसकी बलि ले लेती थी, बली लेने के बाद सुंदर बने रहने के लिए वो उन का दिल निकाल कर खा जाती, मगर किसी में चंद्र लेखा के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं थी क्योंकि चंद्रलेखा के कई अंग्रेज अफसरों के साथ नाजायज संबंध थे, जब यह बात क्रांतिकारियों को पता लगी तो उन्होंने चंद्रलेखा को उस के साथी और उस की दासियों सहीत उन्हीं झोपड़ियों में जिंदा जला दिया था,जिंदा जलने के बाद भी चंद्रलेखा का खौफ कायम रहा,आज भी जब कोई मुसाफिर भूला भटका रात के वक्त वहां पहुंच जाता है तो वो डायने उसका दिल निकाल कर खा जाती हैं ,हितेन उसी सुबह दूसरी बस पकड़ कर दिल्ली वापस लौट गया,मगर हितेन को जब वह खौफनाक रात याद आती है उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं वो आज भी उन लोगों की मौत का जिम्मेदार अपने आप को मानता है, #प्रतियोगिता हेतु

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: Razi
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