स्वैच्छिकता में खुद को पाया, सुकून का था वो सफर, भीड़ से अलग था रास्ता, न कोई डर, न कोई असर। हर कदम पे थी ख़ुशी, हर सांस में सुकून, जब अपने दिल की सुनी, तभी पाया मैंने जूनून।
1. एक सुकून 13 | 7 | 13 | 5 | | 13-10-2024 |
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