उसका मेरे घर के सामने बैठकर , मेरी एक झलक दिख जाने का इंतजार करना .... जब मैं उसके सामने आऊं तो चोरी चोरी मेरा दीदार करना ... मुझसे कुछ देर बात करने के लिए एक बहाना ढूंढना , और जब जब बात शुरू हो जाए तो घंटों मुझसे बाते करना .. वैसे सच कहुं तो बातें तो सिर्फ मै ही करती हूँ, वो तो सिर्फ सुनता है , मेरी उलूल जलूल बातों को भी बड़ी गौर से सुनता है ताकि मैं उससे देर तक बातें करूं .... मै उसके सामने एक अच्छी दोस्त बनने का प्रयास करती हूँ ये जानते हुए भी कि वो मुझसे प्यार करता है , वो मुझसे प्यार तो करता है लेकिन वो कभी कहेगा नहीं , शायद समाज का डर उसे अपने प्यार का इजहार करने से हर बार रोकेगा , सिर्फ समाज का डर ही एक दिन हमे अच्छा दोस्त भी नहीं रहने देगा .... फिर एक दिन हम बिछड़ जाएंगे,ये वो अच्छी तरह से जानता है , लेकिन न जाने फिर भी क्यों बेइंतहा प्यार करता है , उसे लगता है कि मै कुछ नहीं जानती हूँ,लेकिन मैने उसकी आंखों में अपने लिए प्यार देखा है ! मै बस उसकी अच्छी दोस्त रहना चाहती हूं , शायद मुझे भी समाज का डर है ..... उसका मेरे लिए समाज की घटिया बातों को तबज्जों देना , मुझ पर कोई उंगली न उठाए इसीलिए कभी कभी अपने मन को मारते हुए मुझसे बात न करना ...... मेरे घर के सामने बैठकर, मेरी एक झलक दिख जाने का इंतजार करना , और जब मैं सामने आऊं तो चोरी चोरी मेरा दीदार करना ... मुझे हर बार उसके निष्काम प्रेम के आभाष कराता है , फिर सोचती हूँ क्या प्रेम के बीच समाज की जगह है , प्रेम तो प्रेम हैं न तो .... तो क्यों हर बार दो प्रेमी सिर्फ बिछड़ जाते है इसीलिए क्योंकि समाज उन्हें स्वीकार नहीं करता है ? क्या प्रेम गुनाह है ? देखा जाए तो प्रेम करना किसी गुनाह से कम भी नहीं है , यदि ये गुनाह न होता तो क्या दो प्रेमी समाज के दुश्मन बन जाते ? बस उसकी यही सोच मुझे हर बार उसके बारे में सोचने पर मजबूर कर देती है , उसका मेरे घर के सामने बैठकर , मेरी एक झलक दिख जाने का इंतजार करना , जब मैं सामने आऊं तो चोरी चोरी मेरा दीदार करना ... शिवानी शर्मा 🌼
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