नीलामी

विरासत की थी जो दीवारें, अब भी खड़ी हैं शान से, नीलामी में बिक न सकीं, वे यादें भी हैं जान से। कहानी जो थी धरोहर, धन से ना आंकी जाएगी, रख लेंगे हम संभाल कर, ये जंग फिर जी जाएगी।

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