समुद्र की लहरों में एक अद्भुत आकर्षण होता है, जो इंसान के मन को कहीं दूर की यात्रा पर ले जाता है। लहरों का उठना-गिरना और उनका अनगिनत बार किनारे से टकराना जैसे एक अनकही कहानी कहता है। मीरा की जिंदगी भी कुछ ऐसी ही थी—समुद्र की लहरों की तरह सरल, शांत, और गहरी। एक छोटे से गाँव में पली-बढ़ी मीरा को बचपन से ही समुद्र से एक खास लगाव था। हर शाम, वह समुद्र किनारे जाती और घंटों लहरों को निहारती रहती थी, जैसे वे लहरें उसकी भावनाओं को समझ रही हों। मीरा के दिल में एक सपना था—एक ऐसा साथी, जो उसकी जिंदगी की लहरों के साथ कदम मिलाकर चले, उसकी भावनाओं की गहराई को समझे और उसके जीवन को खुशियों से भर दे। उसकी माँ उसे अक्सर टोकती, “मीरा, इन लहरों में खो मत जाना। ये बस पानी की लहरें हैं, कोई सपनों का संसार नहीं।” मगर मीरा के लिए ये लहरें ही उसकी सच्चाई थीं, उसका जीवन। वह यकीन करती थी कि एक दिन, उसकी जिंदगी में भी कोई ऐसा आएगा, जो इन लहरों की तरह उसकी हर बात समझ सकेगा।
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