कच्ची उम्र के प्यार भी कभी-कभी बड़े पक्के जख्म दे जाते हैं, जो भरते तो नहीं है पर उनका जख्म दिल में हमेशा के लिए बस जाता है, जो इंसान को पत्थर दिल भी बनाता और निर्दय भी। यह कहानी भी एक ऐसी ही पत्थर दिल और सनकी आशिक वेद लोहिया की है। वेद जिसने अपने प्यार को पाने के लिए हर कोशिश की आखिर में खुद को बस अकेला पाया। अपना प्यार न मिलने की वजह वह एक सनकी आशिक बन गया। प्यार को अपनी गलती समझने वाला वेद , यह गलती दोबारा करता है जब उसकी जिंदगी में पलक मिश्रा आती है ,और बन जाती है उसकी सनक। क्या वेद का दिल सच में प्यार कर पाएगा पलक से या फिर वह बनके रह जाएगी बस उसकी एक सनक। जानने के लिए पढ़िए 'दिल गलती कर बैठा है' सिर्फ़ लफ्जों की कहानी पर..!
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