सन् 1935 , अचानक से बॉम्बे शहर पर पाखी सिंघानिया के गायब होने का और उसके बॉम्बे ना लौटने का कहर टूटा । दो महीने बीते और पाखी का कहीं से कोई पता नहीं चला । फिर एक दिन राज के पास बिन नाम और पते की चिट्ठी आई जिस पर लिखा था कि पाखी जे जुड़े राज और सबूत बॉम्बे से ज्यादा ऊटी में हैं ? आखिर ऊटी से क्या कनेक्शन था पाखी का ? और क्यों केवल राज के पास ही वो चिट्ठी पहुंची ? और अब क्या करेगा स्पेशल डिपार्टमेंट का विक्रम रॉय जिसकी पॉवर के आगे भारत के बड़े बड़े नामचीन लोग भी झुकते थे ? पूरी कहानी जानने के लिए पढ़िए ‘’ सफऱ : मौत का ‘’ सिर्फ ‘’ लफ्ज़ो की कहानी ‘’ पर ।
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