बरसो पुराना वो मकान हमारा, आज बेरंग सा है... दादी की कहानी और वो बचपन की लड़ाई.. बोहोत याद आती है... बरसो पुराना वो मकान हमारा, आज बेरंग सा है... भरी दोपहर में साथ बैठकर वो लूडो खेलना, आइस क्रीम के लिए गुल्लक का तोड़ देना... बोहोत याद आता है... बरसो पुराना वो मकान हमारा, आज बेरंग सा है... आज नए घर की दीवारों में वो खुशी नही मिलती, जो पुराने मकान की दीवारों पर हम अपनी बचपन सजाते थे... बोहोत याद आती है... बरसो पुराना वो मकान हमारा, आज बेरंग सा है... चल एक बार फिर से बचपन में चलते है, जहां वो पुराना मकान और ढेर सारी खुशियां , और मिल बांट कर खाना... बोहोत याद आता है... बरसो पुराना वो मकान हमारा , आज बेरंग सा है... उस पुराने मकान की दीवारों पर फिर से बचपन बनाते है, जो छूट गया था बरसो पहले, आज उसे जी आते है... बरसो पुराना वो मकान हमारा, आज बेरंग सा है.. #दैनिक प्रतियोगिता हेतु आंचल गुप्ता✍️.. थैंक यू
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