प्यार, परिवार और सामाजिक दबाव की एक दिल दहला देने वाली कहानी.. प्रिया अपनी शादी के दिन सदियों पुरानी दहेज प्रथा को चुनौती देने का साहस जुटाती है। अपने दृढ़ निश्चय के साथ, वह एक वस्तु के रूप में व्यवहार किए जाने से इनकार करती है और इसके बजाय बराबर और इज्जत का जीवन चाहती है। जैसे ही वह एक स्टैंड लेती है, वह अपने आस-पास के लोगों को अपने विरुद्ध खड़ा हुआ पाती है क्योंकि प्रिया ने उनकी मान्यताओं और परंपराओं पर सवाल उठाया था? लेकिन इस बहादुरी की कीमत क्या चुकाएगी पिया? क्या अपने साथी के साथ खुशी पा सकेगी, या फिर उसका लिया हुआ स्टैंड उसे और उसकी शादी के ऊपर खतरा बनकर मंडरा जाएगा? कैसे करेगी प्रिया समाज का सामना? जानने के लिए देखिए मेरी कहानी "दहेज अभिशाप या वरदान"
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