हसीन रातें हैं पर दर्द भरी, दिल का दर्द सुनाएं किसे, कहने को तो बहुत से रिश्ते हैं पास मेरे, पर रात की तन्हाई ही बस आई मेरे हिस्से। चांदनी रात में भी दिल उदास है, हर तरफ रोशनी है, पर दिल में अंधकार है। इन चमकते सितारों में खो गई हूं, जैसे मेरी खुशियों मुझसे दरनिकार है कभी जो बातें दिल को सुकून देती थीं, अब हर एक लफ्ज़ दिल में चुभता है कहने को तो साथ हैं सब, पर दिल की बात कोई नहीं सुनता है। हर चेहरे पर मुस्कान की नकाब है, पर दिल के अंदर की सच्चाई और सवाल है। रिश्तों की भीड़ में भी अकेली सी रहती हूं। जैसे अपनी ही परछाई से बातें करती हूं। रात की तन्हाई में खुद से लड़ती हूं, हर आंसू में अपनी तन्हाई को पाती हूं। कभी सोचा था, ये रातें हंसी-खुशी होंगी, पर अब ये सिर्फ दर्द की सरगम गाती हूं। दिल का दर्द किसी से कह नहीं पाती हूं, बस चुपचाप इसे सहती रहती हूं। हर सुबह एक नई उम्मीद के साथ उठती हूं, पर रात की तन्हाई फिर से लौट आती है। शायद ये दर्द भी एक दिन कम हो जाएगा, कोई ऐसा मिलेगा जो दिल की सुनेगा। पर तब तक इन हसीन रातों में, इस तन्हाई को ही मेरा साथी बनेगा। ✍️✍️✍️ परमजीत
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