एक थी लड़की नादान सी " थी' इस दुनिया से अनजान वो " बड़ी नजर एक धोखेबाज़ कि उस पर " चली चाल अपने इश्क उस पर " मासूम थी' नादान थी ' पहचान ना सकीं धोखेबाज़ हैं वो " फंस गई 'चाल में धोखेबाज़ की वो" दिलाया यकीन धोखेबाज़ ने इतना" लगने लगे थे 'अपने भी पराए उसको_ अपने थे' जानते थे' पहचानते थे इस दुनिया को वो " समझाने लगे 'उस नादान को वो" छोड़ दो आ जाओ लौट कर "धोखेबाज है वो " ना समझ सकी अपनों को वो" छोड़ा अपनों को हो गई 'धोखेबाज की वो " रूठे अपने तोड़ा रिश्ता हो गई 'तन्हा वो " जब दिल भर गया 'धोखेबाज का उससे " छोड़ गया' रोता तड़पता उस नादान को वो " रोती रही बुलाती रही' वापस ना आया' धोखेबाज वो " टूट यकीन हो गई 'नफरत इस दुनिया से उसको" डरने लगी थी ' अब रोशनी से वो " हो गई थी "दोस्ती अंधेरे से उसकी " रोती चिल्लाती तड़पती अंधेरे में वो" जिसे सुनने वाला था ना कोई अब अपना उसको " थक गई थी' हार गई थी' दुःख तकलीफों से वो " चाहती थी' सोना सुकून से वो " एक दिन हो गई आजाद इस दुनिया से वो " छोड़ गई' चीखें अंधेरे में अपनी वो " जिसे सुनने वाला था ना कोई अब अपना उसको "
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