कहीं धूप, कहीं छांव....

कहीं रोती है आंखे, कहीं आंसू नहीं है, कहीं भूखे है बच्चे, कहीं भूख ही नही, यही है जिंदगी यही है बंदगी, कहीं धूप तो कहीं छांव है जिंदगी.........

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लेखक : Shalini Chaudhary
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