1. सुबह का वक्त, एक बड़ी सी खिड़की के सामने ट्रेडमिल में एक ऊंचा लंबा सा लड़का दौड़ रहा था । लड़के की पीठ दरवाजे की तरफ थी । और लड़के के कान में इयरपाडस लगे थे । लड़की के चेहरे पर कोई भी एक्सप्रेशन नहीं थे । लड़का गोरा चिट्टा था । उसकी आंखें थोड़ी काली और हरी थी । वह इतना सुंदर दिखता था कि अगर कोई एक बार उसे देखें तो देखता रह जाए । तभी एक आवाज आई, सर मैंम ने आपके लिए प्रोटीन शेक भिजवाया । एक सर्वेंट की आवाज सुनकर उसे लड़के ने अपने हाथों से प्रोटीन शेक साइड में रखने का इशारा किया । वह सर्वेंट प्रोटीन शेक वहां रखकर चला गया । वह लड़का हाथ में टॉवल लेकर अपने चेहरे पर आए पसीने को बहुत ही सलीके से साफ करता है । और फिर प्रोटीन शेक उठाकर अपने कमरे की तरफ बढ़ जाता है । थोड़ी देर में वह रेडी हो कर अपने कमरे से निकल कर डाइनिंग हॉल पर आ गया । डाइनिंग हॉल पर एक औरत काम कर रही थी । वह लड़का जाकर पीछे से उसे हग करते हुए बोला मां आप इतना काम क्यों करती है? उसे लड़के की मां थोड़ा नाटक करते हुए बोली इसलिए तो कह रही हूं अवि तू शादी कर ले । ( जी यह अवि था । अव्यान खन्ना । जिसकी उम्र 26 की थी ) अवि अपनी मां रीता जी की बात सुनकर बोला क्या मां... आप फिर से वही टॉपिक लेकर बैठ गई । रीता जी अपना थोड़ा मुंह बनाते हुए बोली जब मेरी बात सुननी ही नहीं है तो फिक्र करने का नाटक क्यों करता है ? अवि मुस्कुराया और अपनी मां को घुमा कर अपने सामने किया और उनको कुर्सी पर बिठाया हुआ बोला आप को भी पता है और मुझे भी पता है की कौन नाटक करता है ? रीता जी कुछ कह पाती उससे पहले ही एक आवाज आई अरे अगर मां बेटे का प्यार में पाॅज़ लग गया हो तो कोई हमें भी प्यार कर ले । रीता जी चेहरा घुमा कर देखी जिस तरफ शेखर जी खड़े थे । ( शेखर जी अवि के पिता थे ) रीता जी फिर घड़ी की तरफ देखी और फिर बोली आप 15 मिनट लेट है । शेखर जी रीता जी की बात सुनकर उनके पास आते हुए बहुत प्यार से बोले तुम बोलो तो मैं तुम्हारे साथ ही पूरे टाइम रहुगा फिर लेट भी नहीं होगा और तुम्हारा प्यार भी मिलता रहेगा । रीता जी शेखर जी की बात सुनकर थोड़ा चिढ़ गई पर उनके गाल थोड़े लाल हो गए । वह अपने दोनों एक्सप्रेशन को मिक्स कर के बोली एक तो आप लेट है ऊपर से बेटे के सामने... इतना कह कर वह रुक गई । अवि जो एक किनारे खड़े हो कर दोनों को देख रहा था । उसके लिए ये सीन और प्यार देखना कम ही होता था । क्योंकि वह खुद को जान बुझ कर काम में व्यस्त रखता था । उसका एक कारण थी उसकी मां जो पिछले एक साल से शादी के बोल रही है । और दूसरा कारण वह खुद था । जब उसने देखा सिचुएशन आक्वर्ड हो रही है तो उसने बात को पलटने के लिए बोला गुड मार्निंग पापा । शेखर जी जो रीता जी को कब से परेशान कर रहे थे वो अव्यान को देख कर गुड मार्निंग बोले । शेखर जी अपनी चेयर पर बैठते हुए अव्यान से बोले अवि आज कैसे तुम हमारे साथ नाश्ता कर रहे हो? कहीं तुम्हारी मां ने तुम्हें फिर से तो ब्लैक मेल तो नहीं किया । अव्यान मुस्कुराता हुआ वहीं शेखर जी के बगल में बैठते हुए बोला अरे नहीं पापा, बस आज काम कम था इसलिए सोचा थोड़ा समय आप के साथ बिता लूं । वैसे मां कृति कहां है? ( कृति, कृतिका खन्ना, अव्यान की बहन ) कोई कुछ कह पता उससे पहले एक प्यारी सी नींद भरी आवाज आई । भाई मैं यहां हूं । कृतिका को देखकर सब मुस्कुरा दिए । सिवाय रीता जी के । रीता जी डांटते हुए बोली ये कोई उठने का टाइम है कृति... कृतिका शेखर जी को गुड मार्निंग विश कर के अव्यान को पीछे से गले लगाते हुए बोली क्या मां जब देखो डांटती रहती है । अभी तो सिर्फ 8.30 हुआ है । रीता जी कुछ कहती उससे पहले शेखर जी बोल पड़े सही कहा कृति जब देखो तुम्हारी मां घड़ी ले कर सब को डांट लगाती रहती है । बेचारे हम लोग... शेखर जी की बात सुनकर कर कृति अपने होंठ दबा कर हंसने लगी । कृति को हंसता देख अव्यान कृति को आंखें दिखाता तो वह शांत हो गई । पर रीता जी शेखर जी को आंखें छोटी कर के देख रही थी ... रीता जी कुछ कह पाती उससे पहले एक लड़खड़ाती आवाज आई तुम सब बहू को परेशान क्यों कर रहे हो ? शेखर जी बोले अरे मां हम नहीं आप कि बहू हम सब को परेशान कर रही है । (यह अव्यान और कृतिका की दादी थी ।) दादी हेड आफ द फैमिली की चेयर पर बैठते हुए बोली अगर बहू इतना ही परेशान कर रही है तो छोड़ दें इसे ... और रह अकेले । क्योंकि मैं तो रीता के साथ ही रहुंगी । कृतिका जो अब तक अपनी जगह में बैठ गई थी उसने बोला मैं भी । तभी दादी फिर बोली क्या बात लड़की अभी तो तुमको अपनी मां के डाटने से दिक्कत हो रही थी अब रह अपने पापा के साथ । शेखर जी बेचारा सा मुंह बना के अव्यान की तरफ देखें । तो अव्यान अपना कंधा उचकाता हुआ बोला मुझे मत देखिए मैं तो घर में ही कम रहता हूं । शेखर जी कुछ कहते उससे पहले दादी बोली तुम पहले इस घर से निकलो । अवि अपनी दादी की बात सुनकर थोड़ा हैरान हो गया । और फिर बोला मैं क्यों ? अवि आगे कुछ कह पाता उससे पहले दादी बोली ये घर है होटल नहीं की जब मन पड़ा आए जब मन पड़ा नहीं आए । कृतिका को तो मजा आ रहा था अवि को डांट खाता देख । कृतिका बोली सही बात है दादी भाई तो घर में दिखते ही नही । अवि कृतिका के बोलने के तरीके को देख कर एक आईब्रो उठा कर उसे देखा और आंखों ही आंखों में वार्न किया की बेटा छोटी है छोटी बन के रह । वरना तेरा कोई काम नहीं करुंगा । कृतिका अव्यान को जीभ दिखा के चिढाती है । तो अव्यान उसे इग्नोर कर देता है । थोड़ी बहुत दोनों की नोक झोक चलती है । सब आपस में बात करके हंसते बोलते हैं नाश्ता करते हैं । और फिर कृतिका अपने कमरे में चली जाती है । कृतिका अपनी बी काॅम की पढ़ाई अभी ही कंप्लीट करके फुर्सत हुई थी । अव्यान जब से ऑफिस संभालने लगा था तब से शेखर जी भी ऑफिस जाना कम ही कर दिए थे । रीता जी अपने कुछ एनजीओ के काम से बाहर चली गई । अव्यान भी ऑफिस के लिए निकल गया । अव्यान ने जैसे घर के बाहर कदम रखा उसके चेहरे के एक्सप्रेशन एकदम से गायब हो गए । अव्यान को इस वक्त देख के कोई यह नहीं कह सकता था कि यह वही लड़का है जो कुछ देर पहले मुस्कुरा रहा था । अव्यान अपने आफिस के लिए निकल गया । खन्ना इंडस्ट्री सब आपस में बात करते हुए काम कर रहे थे । सुबह का वक्त था इस वजह से हर कोई थोड़ा बहुत मजाक कर रहा था । पर जैसे ही उन सब को खबर लगी की अध्यान आफिस आ चुका है सबकी बोलती बंद हो गई । और सब अपनी जगह पर बैठकर चुपचाप सीरियस होकर काम करने लगे । अव्यान अपने केबिन में जाते हुए सबको एक नजर देखा और फिर अपने केबिन में जाकर काम करने लगा । थोड़ी देर में एक झटके से उसके केबिन का गेट खुला । अव्यान जो लैपटॉप पर अपनी उंगलियां चल रहा था । वह अपना बिन सर उठाए बोला अब किस बात पर गुस्सा हो कृतार्थ । (कृतार्थ अव्यान का भाई कम दोस्त ज्यादा था । कृतार्थ शेखर जी के दूर के भाई का बेटा था । 15 साल की उम्र में ही कृतार्थ ने अपने पिता को खो दिया । और उसकी मां देहात बचपन में ही हो गया था । तब से ही शेखर जी और रीता जी उसे अपने बेटे की तरह बड़ा किया । शेखर जी और कृतार्थ के पिता दोनों ही बिजनेस पार्टनर भी थे । एक यह कारण भी था शेखर जी कृतार्थ को अपने पास रख लिए । कृतार्थ जब बड़ा हुआ तब वह अपना एक अलग से अपार्टमेंट लेकर घर के पास ही रहने लगा । ) कृतार्थ गुस्से में बोला जब तू आज घर पर नाश्ता करके आने वाला था तो मुझे क्यों नहीं बताया? मैं भी बड़ी मां के हाथ का नाश्ता कर के आता । तू मुझसे जलते हैं । अव्यान अपनी एक आईब्रो उठाकर कृतार्थ को देखा । और फिर उसे इग्नोर करके अपना काम करने लगा ।
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