पलट कर बादलों को यूं जाने दूर नहीं दूंगी, महफिल की हवाओं को मैं खूद से ही लगा लूंगी, अपना अभी कोई महफ़िल में नहीं यारा, जल्द यहां सब को मैं अपना ही बना लूंगी। चाहत का इरादा है मैं कुछ कर के दिखा दूंगी, वक्त दे दे तू मुझको तो, प्यार का एहसास करा दूंगी । कह देगा जो तू मुझसे यू प्यार करता है, तो मैं इस प्यार के खातिर, तुझ पर खूशियां लूटा दूंगी । दूर हो कर भी मैं तुझको महसूस करती हूं , पास होंगी जो तेरे मैं, तो प्यार से घर सजा दूंगी । पा कर एक झलक तेरी मैं खुद में मुस्कुराती हू, कह दे हां अगर जो तू, तो तूझे अपना बना लूंगी । पलट कर बादलों को यूं जाने दूर नहीं दूंगी, महफिल की हवाओं को मैं खूद से ही लगा लूंगी।
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