सुहाना सफर

ये कहानी कुंडलिक नाम के लड़के की है, जो अपने मम्मी पापा से दूर आओ नाना नानी के वहां गांव मे रहा करता था। उसके मम्मी पापा शहर में रहते थे। उन्होंने उसकी पढ़ाई के लिए गांव मे छोड़ रखा था। उसकी मौसी एक टीचर थी। कुंडलिक के पापा ने उसकी पढ़ाई की जिम्मेदारी उसकी मौसी पर सौंप रखी थी। कुंडलिक पढ़ाई लिखाई में तो अच्छा था। लेकिन उसके जीवन मे खुशी नही थी। वो अक्सर उदास रहा करता था। उसको हमेशा अपने मम्मी पापा की याद आती। ना वो अपने मम्मी पापा से मिल सकता था ना ही उनसे बात कर सकता था।

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दैनिक प्रतियोगिता

: विजय सांगा
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