पेड़ हमारा पूर्वज है ऐसा कहा जाता है और सत्य भी है... पेड़ हमारी तरह सजीव है... उसके अंदर भी जीवन है भावना है... वो बेजुबान है लेकिन उसे भी लगाव होता है.. ये कहानी एक पेड़ की आत्मकथा है जिसे आज भी अपने दोस्त अरविंद शुक्ला का इंतजार है... पढ़े पेड़ की आत्मकथा पेड़ की जुबानी मेरे यानी शालिनी चौधरी के साथ only on लफ्जों की कहानी पर.
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