यह किताब हैं - चन्द लफ्व्ज़ों को सहेज कर चन्द पंक्तियों में सँवरती हुई। किताब का नाम है, "यूँ ही"। बिना कोई वजह लिए बस भावों में मचलती हुई।
1. 1 3 | 1 | 14 | 4 | | |
2. 2 3 | 2 | 11 | 3 | | |
3. 3 2 | 1 | 10 | 4 | | |
4. 4 2 | 1 | 10 | 3 | | |
5. 5 2 | 1 | 9 | 3 | | |
6. 6 2 | 1 | 9 | 3 | | |
7. 7 2 | 1 | 8 | 3 | | |
8. 8 2 | 1 | 6 | 3 | | |
9. 9 2 | 1 | 6 | 3 | | |
10. 10 2 | 1 | 5 | 3 | | |
11. 11 2 | 1 | 4 | 2 | | |
12. 12 2 | 1 | 2 | 4 | | |
13. 13 3 | 2 | 1 | 4 | | |
14. 14 4 | 1 | 1 | 4 | | |
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