यूँ ही _

यह किताब हैं - चन्द लफ्व्ज़ों को सहेज कर चन्द पंक्तियों में सँवरती हुई। किताब का नाम है, "यूँ ही"। बिना कोई वजह लिए बस भावों में मचलती हुई।

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कविता

: Rajni Arora
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