ख्वाबों मे वो लड़का

ख़्वाबों में बसा वो लड़का कभी-कभी हमारी जिंदगी में कुछ लोग बिना दस्तक दिए ही चले आते हैं। न उनसे कोई मुलाकात होती है, न कोई पहचान होती है, फिर भी जाने क्यों दिल उन्हें अपना मान बैठता है। वह हमारे ख्यालों में रहने लगते हैं, हमारी मुस्कान की वजह बन जाते हैं और धीरे-धीरे हमारे सपनों का हिस्सा बन जाते हैं। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। मेरी जिंदगी में एक ऐसा लड़का था, जिसे मैंने कभी सच में देखा तक नहीं था, फिर भी वह मुझे दुनिया के सबसे करीब इंसान जैसा लगता था। वह सिर्फ मेरे ख़्वाबों में रहता था, लेकिन मेरे लिए उसकी मौजूदगी किसी हकीकत से कम नहीं थी। मैं अक्सर रात को अपनी खिड़की के पास बैठकर आसमान को देखा करती थी। तारों को देखते हुए न जाने कितनी कहानियाँ अपने मन में बना लेती थी। उन्हीं कहानियों में एक लड़का हमेशा मेरे साथ होता था। मुझे नहीं पता था उसका नाम क्या है, वह कहाँ रहता है या उसका चेहरा कैसा है। लेकिन मेरी कल्पना में उसका चेहरा हमेशा साफ होता था। उसकी आँखों में एक अजीब-सी शांति थी और चेहरे पर ऐसी मुस्कान, जिसे देखकर लगता था जैसे दुनिया की सारी परेशानियाँ कुछ पल के लिए दूर हो गई हों। वह मेरी कल्पना का कोई साधारण किरदार नहीं था। वह मेरी उन बातों को समझता था, जिन्हें मैं किसी के सामने कह नहीं पाती थी। जब मैं उदास होती, तो अपने मन में उससे बातें करती। जब किसी बात से डरती, तो सोचती कि वह मेरे पास खड़ा है और कह रहा है कि सब ठीक हो जाएगा। जब कोई मेरी बात नहीं समझता, तब मैं अपनी डायरी खोलकर उसी से बातें करने लगती। मेरी डायरी के पन्नों पर उसका जिक्र धीरे-धीरे बढ़ने लगा था। कभी मैं लिखती—“आज उसका ख्याल बहुत आया।” कभी लिखती—“आज फिर वह मेरे सपने में आया।” और कभी बस उसका एक छोटा-सा स्केच बनाकर पन्ना बंद कर देती। मुझे खुद समझ नहीं आता था कि मैं एक ऐसे इंसान के बारे में इतना क्यों सोचती हूँ, जो असल में मेरी जिंदगी में था ही नहीं। एक रात मैंने अपनी डायरी में लिखा, “शायद कुछ लोग हमारी जिंदगी में आने के लिए नहीं, बल्कि हमें यह एहसास दिलाने के लिए आते हैं कि हमारे दिल में प्यार और उम्मीद अभी बाकी है।” उस रात भी मैं उसी के बारे में सोचते-सोचते सो गई। फिर वही सपना आया। मैं एक बहुत खूबसूरत जगह पर थी। चारों तरफ हल्की बारिश हो रही थी। सड़क के किनारे पीली रोशनी वाले छोटे-छोटे लैम्प जल रहे थे। हवा में मिट्टी की खुशबू थी। मैं अकेली चल रही थी, तभी सामने से वही लड़का आता हुआ दिखाई दिया। इस बार वह पहले से ज्यादा साफ दिखाई दे रहा था। उसने मुझे देखकर मुस्कुराया और कुछ नहीं कहा। बस मेरे पास आकर खड़ा हो गया। मैंने उससे पूछा, “तुम हर बार मेरे सपने में क्यों आते हो?” वह कुछ पल चुप रहा, फिर बोला, “शायद इसलिए क्योंकि तुम मुझे ढूँढ रही हो।” मैंने हैरानी से पूछा, “लेकिन मैंने तुम्हें कभी देखा तक नहीं।” वह मुस्कुराया और बोला, “हर मुलाकात आँखों से नहीं होती।” इतना कहकर वह धीरे-धीरे मेरी आँखों के सामने से गायब हो गया। मेरी आँख खुल गई। सुबह हो चुकी थी, लेकिन उस सपने की बातें मेरे मन में अटकी हुई थीं। पहली बार मुझे लगा कि शायद वह सिर्फ मेरी कल्पना नहीं है। शायद कहीं न कहीं कोई ऐसा इंसान सच में मौजूद है, जिसे मैं अभी तक जानती नहीं। दिन गुजरते गए। मैं अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गई। डायरी लिखना, अपने सपनों के बारे में सोचना और अपनी छोटी-सी दुनिया में खुश रहना मेरी आदत बन चुका था। लेकिन वह लड़का अब भी मेरे सपनों में आता था। फिर एक दिन मेरी जिंदगी में कुछ ऐसा हुआ, जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। मैं अपनी एक दोस्त के साथ एक किताबों की दुकान पर गई थी। मैं किताबों के बीच घूम रही थी कि अचानक मेरी नजर सामने खड़े एक लड़के पर पड़ी। वह अपनी पसंद की किताब ढूँढ रहा था। मैं वहीं रुक गई। मेरे हाथ से किताब लगभग छूटते-छूटते बची। उसकी आँखें… उसकी मुस्कान… उसके बाल… सब कुछ वैसा ही था। जैसा मैंने अपने सपनों में देखा था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं उसे देख रही थी या अपने किसी पुराने सपने को। वह मेरी तरफ मुड़ा और हमारी नजरें मिलीं। कुछ सेकंड के लिए जैसे आसपास की सारी आवाजें गायब हो गईं। उसने मुस्कुराकर पूछा, “आप ठीक हैं?” मैं कुछ बोल नहीं पाई। मेरी दोस्त ने मुझे आवाज दी तो मैं जैसे अचानक होश में आई। मैंने खुद को संभालते हुए कहा, “हाँ… मैं ठीक हूँ।” लेकिन मेरा दिल जानता था कि उस पल के बाद कुछ भी पहले जैसा नहीं रहने वाला था। उस दिन घर लौटकर मैंने सबसे पहले अपनी डायरी खोली। हाथ काँप रहे थे। मैंने पन्ने पर सिर्फ एक लाइन लिखी— “आज मेरा ख़्वाब मेरे सामने खड़ा था।” उसके बाद कई दिनों तक मैं सोचती रही कि यह सिर्फ एक संयोग था या कुछ और। क्या सच में हमारी जिंदगी में कुछ लोग पहले हमारे सपनों में आते हैं और फिर हकीकत बनकर सामने खड़े हो जाते हैं? कुछ दिनों बाद मेरी उससे फिर मुलाकात हुई। इस बार हमने ठीक से बात की। उसका नाम आरव था। वह शांत स्वभाव का था और किताबों का बहुत शौकीन था। बातचीत के दौरान उसने ऐसी कई बातें कहीं, जो बिल्कुल वही थीं, जो मैं अपने सपनों वाले लड़के के बारे में सोचती थी। मैंने उससे पूछा, “क्या तुम्हें कभी ऐसा लगता है कि तुम किसी ऐसे इंसान को जानते हो, जिससे तुम वास्तव में कभी मिले ही नहीं?” वह कुछ पल मुझे देखता रहा और फिर मुस्कुराकर बोला, “हाँ… कभी-कभी लगता है कि कोई इंसान मिलने से पहले ही हमारे ख्यालों में कहीं मौजूद होता है।” मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई। मैंने कुछ नहीं कहा। शायद कुछ जवाब शब्दों में नहीं होते। उसके बाद हमारी मुलाकातें बढ़ने लगीं। हम बातें करने लगे, किताबें शेयर करने लगे और अपनी-अपनी पसंद की चीजों के बारे में बताने लगे। धीरे-धीरे मुझे महसूस हुआ कि मेरे सपनों में रहने वाला वह लड़का सिर्फ मेरी कल्पना नहीं था। वह एक असली इंसान था, जिसकी अपनी परेशानियाँ थीं, अपने सपने थे और अपनी एक अलग कहानी थी। एक शाम मैंने उससे पूछा, “अगर मैं तुम्हें बताऊँ कि मैंने तुम्हें पहले भी देखा है, तो क्या तुम यकीन करोगे?” वह हँसकर बोला, “कहाँ?” मैंने आसमान की तरफ देखते हुए कहा, “अपने ख़्वाबों में।” वह कुछ देर चुप रहा। फिर उसने मुस्कुराकर कहा, “तो शायद मैं बहुत खुशकिस्मत हूँ कि किसी की कहानी में आने से पहले ही उसका किरदार बन चुका था।” मैं भी मुस्कुरा दी। उस रात मैंने अपनी डायरी में आखिरी बार उसके बारे में लिखा। “कुछ ख़्वाब आँखें बंद करने पर दिखाई देते हैं और कुछ आँखें खोलने के बाद। मेरा ख़्वाब उन दोनों के बीच कहीं था। मैंने उसे पहले अपनी कल्पना में महसूस किया, फिर अपनी जिंदगी में पाया। शायद हर सपना पूरा होने के लिए नहीं होता, लेकिन कुछ सपने हमें रास्ता दिखाने के लिए जरूर आते हैं।” मैं नहीं जानती थी कि हमारी कहानी आगे कहाँ जाएगी। यह रिश्ता जिंदगी भर चलेगा या कुछ समय बाद सिर्फ एक खूबसूरत याद बनकर रह जाएगा। लेकिन एक बात मैं जरूर जानती थी—वह लड़का जिसने कभी मेरी नींदों में जगह बनाई थी, अब मेरी जिंदगी की एक खूबसूरत हकीकत बन चुका था। और शायद यही जिंदगी की सबसे खूबसूरत बात है— कभी-कभी जिसे हम सिर्फ ख़्वाब समझकर आँखें बंद कर लेते हैं, वही एक दिन हमारी आँखें खोलकर हकीकत बनकर सामने खड़ा हो जाता है। वह लड़का आज भी मेरे ख़्वाबों में आता है… फर्क बस इतना है कि अब आँख खुलने पर वह गायब नहीं होता। अब वह मेरी कहानी का हिस्सा है। ❤️


: ♥️𝄟≛⃝Sweta Agrawal🌹❤️ 🕊
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