बेशक तुम तो समझो

बेशक तुम तो समझो… 🥀❤️ बेशक तुम तो समझो, मेरी खामोशी के पीछे छुपी बातों को, हर मुस्कान के पीछे छुपे एहसासों को, और आँखों में ठहरे उन जज़्बातों को…। मैं हर बात कह नहीं पाती, कुछ दर्द लफ़्ज़ों में ढल नहीं पाते, कभी हँसकर टाल देती हूँ सब कुछ, क्योंकि अपने ही दिल को समझा नहीं पाती। बेशक तुम तो समझो, जब मैं कहूँ “कुछ नहीं”, तो कुछ तो होता है, जब मैं चुप रहूँ, तो दिल बहुत कुछ कहता है, और जब मैं दूर रहूँ, तो मन तुम्हें ही ढूँढता है। मेरी खामोशी को आवाज़ दे देना, मेरी उलझनों को थोड़ा सुलझा देना, मैं जैसी हूँ, बस वैसी ही रहने देना, बेशक तुम तो समझो… मुझे बिना कहे समझ लेना। 🥀✨ श्वेता अग्रवाल ✍️🥀

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कविता

: ♥️𝄟≛⃝Sweta Agrawal🌹❤️ 🕊
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