यह कविता आधुनिक दौर की एक अनोखी और सच्ची दोस्ती का खूबसूरत ताना-बाना बुनती है। यह दर्शाती है कि दोस्ती सिर्फ बचपन के स्कूल, कॉलेज या मोहल्ले की चौखट तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह फोन पर अजनबियों के बीच हुए एक छोटे से सवाल-जवाब से भी शुरू हो सकती है। किसी अनजान से बात करके धीरे-धीरे भरोसा बनाना भले ही एक कठिन सफर हो, लेकिन जब यह रिश्ता गहरा होता है, तो अटूट बन जाता है। माँ के निस्वार्थ प्यार के बाद दुनिया में सच्चे दोस्त ही होते हैं, जो इस रिश्ते की खातिर अपनी जान तक लुटाने का दम रखते हैं।
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