गलत कहते है लोग,की सफेद रंग में वफ़ा होती है, अगर ऐसा होता तो आज नमक, जख्मों की दवा होती। ये कहानी है राही अग्निहोत्री की,जिसकी राह के हर मोड़ में उसे ज़ख़्म मिलते जा रहे है। जो जख्म उसे दे रहा है वो सामने जरूर है बिलकुल उस चांद की तरह।जिसे छूना ही,ना मुमकिन है।इन्ही जख्मों की टोकर खा कर राही, अपनी ज़ख्मी दिल की मरहम डूंडने इस जालिम दुनिया में अपना ही राह बना रही है।वही दूसरी तरफ है दर्श ओबेरॉय,जो अपने ही दुनिया का बादशाह है,बेहद जिद्दी घमंड, रूड,हार्टलेस ,अपने ही एटीट्यूड में जीने वाला इंसान।जो चाहता है वो अपनी मुट्ठी में लेने की ताकत रखने वाला ,अभी भी अपनी मंजिल तक नही पहुंच पा रहा है,जो उसके मंजिल में रुखावट बन रहा है वो बेहद दर्द भरी बिना निशान वाली ज़ख्म देते जा रहा है,लेकिन इसी सफर में उसे पहले से ही जख्मी लड़की मिलती है जो दो साल से कोमा में है,क्या करेगा दर्श उसके साथ ?कोन है वो लड़की ? क्या है दर्श का मंजिल ?क्या राही और दर्श का मुलाकात होगी ? क्या राही की जख्म भर जायेंगे ? पढ़ते रहिए " yah Dil Zakhmi sa hai l " Only on lafzo ki kahani.
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