रावण को अक्सर केवल एक खलनायक के रूप में याद किया जाता है, लेकिन क्या वह सच में सिर्फ एक राक्षस था? यह ऐतिहासिक कहानी रावण के उस रूप को सामने लाती है जिसे इतिहास ने भुला दिया - एक प्रकांड विद्वान, शिवभक्त, महान संगीतज्ञ, कुशल रणनीतिकार और लंका जैसे स्वर्णिम साम्राज्य का निर्माता। एक ऐसे राजा की कहानी जिसके पास ज्ञान था, शक्ति थी, भक्ति थी, फिर भी एक ही दोष - अहंकार - ने उसके पूरे साम्राज्य को मिटा दिया। यह कहानी है कि कैसे बुद्धि पर अहंकार भारी पड़ता है, और कैसे अपनों की सलाह न सुनना सबसे बड़े विनाश का कारण बनता है। अगर आप पौराणिक कथाओं को नए नजरिए से, लीडरशिप और मनोविज्ञान के चश्मे से पढ़ना पसंद करते हैं, तो यह किताब आपके लिए है।
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