इश्क की पहली दस्तक

इश्क़ की पहली दस्तक... ❤️ इश्क़ की पहली दस्तक जब दिल पर हुई, लगा जैसे ख़ुदा की कोई दुआ क़ुबूल हुई। साँसों ने पहली बार किसी और का नाम लिया, और धड़कनों ने ख़ामोशी में उसका सलाम किया। उसकी एक झलक ने मौसम बदल डाला, सूने से दिल में मोहब्बत का गुलाब खिला डाला। वो मुस्कुराया तो लगा चाँद ज़मीं पर उतर आया, उसकी आँखों ने मेरा हर ख़्वाब अपना बना डाला। अब हर शाम उसका इंतज़ार अच्छा लगता है, हर रास्ता उसी के घर की ओर जाता लगता है। हवा भी जब छूकर गुज़रती है बदन को, उसके एहसास का आँचल लहराता लगता है। उसका नाम लबों पर आए तो दुआ बन जाए, उसकी बाँहों का ख़याल ही पनाह बन जाए। काश एक पल को वो मेरे क़रीब आ जाए, और वक़्त उसी पल में हमेशा के लिए ठहर जाए। इश्क़ की पहली दस्तक ऐसी ही तो होती है... बिना इज़हार के भी मोहब्बत मुकम्मल सी लगती है। दो दिलों के बीच कोई फ़ासला नहीं रहता, बस एक नज़र मिलती है... और पूरी ज़िंदगी उसी नज़र की कहानी बन जाती है।

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कविता

: Dhaara shree
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