आखिरी मैसेज ""

आख़िरी मैसेज 🥀 रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी। आसमान में बिजली चमक रही थी और खिड़की के शीशों पर गिरती बारिश की बूंदें किसी अधूरी कहानी का संगीत बन गई थीं। कमरे की सारी लाइटें बंद थीं। सिर्फ़ मोबाइल की हल्की-सी रोशनी आदित्य के चेहरे पर पड़ रही थी। उसकी आँखें लगातार एक ही चैट पर टिकी थीं। उस चैट के सबसे नीचे एक मैसेज था, जिसे वह पिछले छह महीनों से न जाने कितनी बार पढ़ चुका था। हर बार उसे लगता, शायद इस बार उन शब्दों का मतलब बदल जाएगा। लेकिन शब्द कभी नहीं बदलते, सिर्फ़ उन्हें पढ़ने वाले बदल जाते हैं। आदित्य और नायरा की मुलाक़ात एक सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर हुई थी। शुरुआत में दोनों सिर्फ़ कहानियों और किताबों की बातें करते थे। धीरे-धीरे बातें आदत बन गईं। सुबह की पहली मुस्कान से लेकर रात की आख़िरी शुभरात्रि तक, दोनों का हर दिन एक-दूसरे के नाम होता था। उन्होंने कभी प्यार का इज़हार बड़े शब्दों में नहीं किया, लेकिन उनके बीच का अपनापन किसी इज़हार का मोहताज भी नहीं था। दोनों अलग-अलग शहरों में रहते थे, फिर भी उन्हें लगता था कि दिलों के बीच की दूरी कभी मायने नहीं रखती। नायरा बहुत समझदार और शांत स्वभाव की लड़की थी। वह हमेशा दूसरों की खुशियों को अपनी खुशी मान लेती थी। दूसरी तरफ़ आदित्य थोड़ा ज़िद्दी था। वह नायरा से बेहद प्यार करता था, लेकिन उसका प्यार कभी-कभी अधिकार में बदल जाता था। अगर नायरा कुछ घंटों तक जवाब न दे, तो वह परेशान होने के बजाय नाराज़ हो जाता। नायरा हर बार उसे प्यार से समझाती, "हर देर का मतलब बदल जाना नहीं होता, कभी-कभी ज़िंदगी भी वक्त माँग लेती है।" आदित्य उसकी बात सुन तो लेता, लेकिन पूरी तरह समझ नहीं पाता था। कुछ महीनों बाद नायरा के घर की परिस्थितियाँ बदल गईं। उसकी माँ की तबीयत लगातार खराब रहने लगी। घर की ज़िम्मेदारियाँ अचानक उसके कंधों पर आ गईं। पहले जो लड़की घंटों बातें किया करती थी, अब मुश्किल से कुछ मिनट निकाल पाती थी। वह कोशिश करती कि आदित्य को अकेलापन महसूस न हो, लेकिन हर कोशिश अधूरी रह जाती। आदित्य को लगने लगा कि शायद अब वह पहले जैसी नहीं रही। उसने कई बार अपनी नाराज़गी जताई, जबकि नायरा सिर्फ़ हालात से लड़ रही थी। एक शाम आदित्य ने गुस्से में नायरा को लंबा-सा मैसेज भेज दिया। उसने लिख दिया कि अगर उसके पास अब रिश्ते के लिए समय नहीं है, तो वह साफ़-साफ़ कह दे। उसने यह भी लिख दिया कि शायद अब उसकी ज़िंदगी में कोई और आ गया है। हर शब्द गुस्से में लिखा गया था, लेकिन उन शब्दों ने नायरा के दिल को गहराई तक चोट पहुँचा दी। करीब आधे घंटे बाद नायरा का जवाब आया। "तुम्हें हमेशा लगा कि मैं बदल गई हूँ, लेकिन तुमने कभी यह जानने की कोशिश नहीं की कि मैं किन हालात से गुज़र रही हूँ। मैं हर दिन अपने घर, अपनी माँ और अपनी ज़िम्मेदारियों के बीच खुद को संभाल रही थी। मैं चाहती थी कि तुम मेरा सहारा बनो, लेकिन तुमने मुझे ही कटघरे में खड़ा कर दिया। शायद मेरी ख़ामोशी तुम्हें समझ नहीं आई। अगर मेरी मौजूदगी तुम्हें तकलीफ़ दे रही है, तो मैं चली जाती हूँ। अपना ख़याल रखना... अलविदा।" आदित्य ने वह मैसेज पढ़ा, लेकिन उसका अहंकार उससे बड़ा था। उसने सोचा, "दो-चार दिन बाद खुद ही बात कर लेगी।" उसने जवाब नहीं दिया। दिन बीतते गए। एक दिन... दो दिन... फिर एक हफ़्ता। नायरा की तरफ़ से कोई मैसेज नहीं आया। आदित्य ने भी ज़िद में कोई पहल नहीं की। लेकिन जब दो हफ़्ते पूरे हो गए, तो बेचैनी बढ़ने लगी। उसने कॉल किया। नंबर बंद था। उसने सोशल मीडिया खोला। हर जगह उसका अकाउंट गायब था। अब उसे अपनी गलती समझ आने लगी थी। उसने नायरा की सहेली से संपर्क किया, लेकिन उसे भी कुछ नहीं पता था। हर दिन उम्मीद और डर के बीच बीतने लगा। करीब छह महीने बाद आदित्य को एक अनजान नंबर से कॉल आया। सामने नायरा के बड़े भाई थे। उनकी आवाज़ बेहद धीमी थी। "क्या आप आदित्य बोल रहे हैं?" "जी... नायरा कैसी है? कहाँ है वो?" कुछ पल की ख़ामोशी के बाद उधर से आवाज़ आई— "नायरा अब इस दुनिया में नहीं है।" आदित्य के हाथ से मोबाइल छूटते-छूटते बचा। "क्या... क्या हुआ उसे?" "माँ के इलाज के दौरान उसकी तबीयत भी लगातार बिगड़ती गई। उसने कभी किसी को नहीं बताया कि वह खुद भी गंभीर बीमारी से लड़ रही थी। आख़िरी दिनों में भी वह हर रोज़ आपका नाम लेती थी। उसने कहा था कि अगर कभी आदित्य पूछे... तो उसे मेरा आख़िरी मैसेज ज़रूर दे देना।" कुछ देर बाद आदित्य के फोन पर एक स्क्रीनशॉट आया। "आदित्य... अगर कभी मेरी याद आए, तो खुद को दोष मत देना। प्यार में नाराज़गी होना गलत नहीं होता, लेकिन बिना समझे किसी अपने को खो देना बहुत दर्द देता है। मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूँ। बस एक वादा करो... आगे कभी किसी अपने की ख़ामोशी को उसकी बेवफ़ाई मत समझना। हर इंसान अपनी लड़ाई लड़ रहा होता है। खुश रहना... हमेशा।" स्क्रीन धुंधली हो चुकी थी। आँसू लगातार गिर रहे थे। आदित्य उस मैसेज को सीने से लगाकर फूट-फूटकर रो पड़ा। उसे पहली बार एहसास हुआ कि माफ़ी माँगने में की गई थोड़ी-सी देर पूरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी सज़ा बन सकती है। उस रात उसने नायरा की चैट खोली और बहुत लंबा मैसेज लिखा। उसने अपनी हर गलती स्वीकार की। उसने लिखा कि वह आज भी उससे उतना ही प्यार करता है। उसने लिखा कि काश उस दिन उसने सिर्फ़ एक बार उसकी बात सुन ली होती। लेकिन वह मैसेज कभी भेजा नहीं जा सका। जिस नंबर पर वह भेजना चाहता था, वह हमेशा के लिए बंद हो चुका था। उस दिन के बाद आदित्य ने अपनी ज़िंदगी बदल दी। उसने हर रिश्ते को समय देना शुरू किया। किसी की ख़ामोशी पर फैसला सुनाने से पहले उसकी वजह जानने लगा। क्योंकि उसने अपनी ज़िंदगी का सबसे कीमती इंसान सिर्फ़ इसलिए खो दिया था, क्योंकि उसने गुस्से को प्यार से बड़ा समझ लिया था। कहते हैं, कुछ कहानियाँ मिलकर पूरी होती हैं, और कुछ बिछड़कर। लेकिन हर अधूरी कहानी एक सीख ज़रूर छोड़ जाती है। "आख़िरी मैसेज" सिर्फ़ कुछ शब्द नहीं था, बल्कि वह एहसास था जिसने आदित्य को सिखाया कि रिश्ते भरोसे से चलते हैं, शक से नहीं। और ज़िंदगी इतनी लंबी भी नहीं होती कि हर बात के लिए "कल" का इंतज़ार किया जाए। कभी-कभी एक छोटा-सा जवाब, एक सच्ची माफ़ी और एक पल की समझदारी पूरी ज़िंदगी बदल सकती है। श्वेता अग्रवाल 🖤✍️


: ♥️𝄟≛⃝Sweta Agrawal🌹❤️ 🕊
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