आज का दौर

आज का दौर सिर्फ बदलते समय की कहानी नहीं, बल्कि उस इंसान की आवाज है जो भीड़ में रहकर भी खुद को तलाश रहा है। यह कविता आधुनिक जिंदगी की सच्चाइयों, टूटते रिश्तों और जिंदा उम्मीदों का आईना है।


: विजय सांगा
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