हैवान बरसात की उस काली रात में आसमान लगातार गरज रहा था। बिजली की चमक कुछ पल के लिए पूरे जंगल को रोशन करती और अगले ही पल चारों ओर ऐसा अंधेरा छा जाता मानो रोशनी कभी थी ही नहीं। उसी जंगल के बीचों-बीच एक पुरानी, जर्जर हवेली खड़ी थी। जिसे लोग वर्षों से "मौत की हवेली" कहते थे। गाँव के बुज़ुर्गों का दावा था कि जो भी रात के समय उस हवेली के भीतर गया। वह कभी वापस नहीं लौटा। कुछ लोगों ने वहाँ लाल चमकती आँखें देखी थीं। तो कुछ ने आधी रात को किसी जानवर जैसी डरावनी गुर्राहट सुनी थी। धीरे-धीरे उस हवेली का नाम एक ही शब्द में बदल गया। ""हैवान का अड्डा।"" गाँव में पिछले तीन महीनों से हर पंद्रहवें दिन एक इंसान रहस्यमय तरीके से गायब हो रहा था। न कोई फिरौती का संदेश मिलता, न किसी दुश्मनी का सुराग। बस जंगल की ओर जाती घसीटने के निशान और ज़मीन पर सूख चुका खून। पुलिस हर बार जाँच करती। लेकिन खाली हाथ लौट आती। डर इतना बढ़ चुका था कि सूरज ढलते ही पूरा गाँव अपने घरों में बंद हो जाता। इसी बीच शहर से क्राइम ब्रांच अधिकारी आर्यन राठौड़ को इस मामले की जाँच सौंपी गई। आर्यन अंधविश्वास पर नहीं, सबूतों पर विश्वास करता था। गाँव पहुँचते ही उसने लोगों से पूछताछ शुरू की, लेकिन हर किसी की ज़ुबान पर एक ही नाम था। "हैवान।"" कोई कहता वह इंसान नहीं, शैतान है। कोई कहता वह रात में अपना रूप बदल लेता है। आर्यन इन बातों पर मुस्कुरा देता। मगर उसके मन में एक सवाल बार-बार उठ रहा था। अगर यह सब झूठ है, तो असली कातिल कौन है? पहली ही रात आर्यन ने जंगल के किनारे निगरानी करने का फैसला किया। आधी रात होते ही अचानक दूर झाड़ियों में तेज़ सरसराहट हुई। उसने टॉर्च की रोशनी उधर डाली, लेकिन वहाँ कुछ नहीं था। तभी उसके पीछे किसी की भारी साँसों की आवाज़ गूँजी। वह पलटा, मगर अंधेरे के सिवा कुछ दिखाई नहीं दिया। अगले ही पल पेड़ों के बीच दो लाल आँखें चमकीं। इससे पहले कि वह निशाना साध पाता, कोई बिजली की गति से उसकी ओर झपटा। आर्यन ज़मीन पर गिर पड़ा, लेकिन हमलावर उतनी ही तेज़ी से अंधेरे में गायब हो गया। ज़मीन पर केवल चार गहरे पंजों के निशान रह गए थे। इतने बड़े कि किसी इंसान के नहीं लगते थे। सुबह जब उन निशानों की जाँच हुई। तो एक चौंकाने वाली बात सामने आई। वे असली पंजों के नहीं, बल्कि लोहे से बने किसी विशेष औज़ार के निशान थे। इसका मतलब साफ़ था। कोई इंसान जानबूझकर खुद को हैवान साबित कर रहा था। लेकिन क्यों? किसलिए? उसी शाम गाँव का एक युवक, जिसने दावा किया था कि उसने हैवान का चेहरा देखा है, अचानक लापता हो गया। उसकी तलाश में पूरा गाँव जंगल पहुँचा। कुछ दूर एक पेड़ के नीचे उसका मोबाइल मिला। जिसकी स्क्रीन पर आख़िरी रिकॉर्डिंग चल रही थी। वीडियो में सिर्फ़ अंधेरा था, भारी साँसों की आवाज़ें थीं... और फिर एक खुरदुरी आवाज़ सुनाई दी— "इंसानों से बड़ा कोई हैवान नहीं होता..." अगले ही पल स्क्रीन काली हो गई। आर्यन ने मोबाइल कसकर अपनी मुट्ठी में पकड़ लिया। उसे पहली बार महसूस हुआ कि यह मामला सिर्फ़ एक सीरियल किलर का नहीं था। कोई ऐसा खेल खेला जा रहा था जिसमें डर ही सबसे बड़ा हथियार था... और उस खेल का अगला निशाना शायद वही बनने वाला था। यह कहानी आगे और गहरी होती है, जहाँ हर किरदार पर शक होगा, कई चौंकाने वाले राज़ खुलेंगे और अंत में ऐसा ट्विस्ट आएगा कि असली "हैवान" कौन है, यह जानकर पाठक भी स्तब्ध रह जाएगा। आर्यन पूरी रात उस वीडियो को बार-बार देखता रहा। हर बार वही अंधेरा, वही भारी साँसें और वही खुरदुरी आवाज़—"इंसानों से बड़ा कोई हैवान नहीं होता..." लेकिन इस बार उसकी नज़र एक ऐसी चीज़ पर पड़ी जो पहले किसी ने नहीं देखी थी। वीडियो के आख़िरी दो सेकंड में बिजली चमकी थी और दूर एक पेड़ के तने पर सफेद रंग से बना एक अजीब-सा निशान दिखाई दिया था। वह कोई साधारण निशान नहीं था, बल्कि किसी गुप्त संगठन का प्रतीक लग रहा था। सुबह होते ही आर्यन उस जगह पहुँचा। पेड़ पर बना वही निशान अब भी मौजूद था, लेकिन उसके नीचे ताज़ी मिट्टी खुदी हुई थी। जब पुलिस ने खुदाई शुरू की, तो कुछ ही देर में ज़मीन के भीतर से एक पुराना लोहे का संदूक निकला। संदूक के अंदर कई साल पुराने अख़बार, कुछ तस्वीरें और एक फटी हुई डायरी रखी थी। डायरी के पहले पन्ने पर लिखा था। "अगर यह डायरी किसी के हाथ लगे, तो समझ लेना कि हैवान जाग चुका है।" डायरी करीब पच्चीस साल पुरानी थी। उसमें लिखा था कि इसी गाँव में कभी पाँच दोस्तों ने मिलकर जंगल के बीच रहने वाले एक गरीब परिवार को ज़मीन के लालच में ज़िंदा जला दिया था। उन्होंने उस घटना को हादसा बताकर दबा दिया, लेकिन मरने से पहले उस परिवार के मुखिया ने कहा था, "तुम सबकी मौत तुम्हारे अपने डर से होगी।" इसके बाद एक-एक करके वे पाँचों रहस्यमय परिस्थितियों में मारे गए। गाँव वालों ने तभी से यह मान लिया कि जंगल में कोई शापित शक्ति रहती है। आर्यन को लगा कि यह सब अंधविश्वास फैलाने की चाल है। लेकिन तभी उसे डायरी के आख़िरी पन्ने पर एक नाम दिखाई दिया। "" ठाकुर वीरेंद्र प्रताप। वही व्यक्ति जिसे पूरा गाँव सबसे सम्मानित इंसान मानता था। उसी शाम आर्यन ने ठाकुर से सवाल किए। ठाकुर ने शांत चेहरे के साथ हर आरोप को झूठ बताया, लेकिन जब आर्यन ने डायरी उसके सामने रखी, तो कुछ पल के लिए उसके चेहरे का रंग उड़ गया। अगले ही पल उसने खुद को संभाल लिया और बोला, "कुछ सच इतने पुराने होते हैं कि उन्हें दफन ही रहने देना चाहिए।" उस रात गाँव पर फिर घना अंधेरा छा गया। अचानक पूरे गाँव की बिजली चली गई। चारों तरफ सन्नाटा फैल गया। तभी दूर जंगल से किसी की दर्दनाक चीख सुनाई दी। आर्यन और उसकी टीम हथियार लेकर दौड़े। जंगल के बीच एक खुली जगह पर पहुँचते ही उन्होंने देखा कि ज़मीन पर ताज़ा खून फैला हुआ था, लेकिन वहाँ कोई लाश नहीं थी। पेड़ों पर गहरे पंजों के निशान बने थे और हवा में वही अजीब गुर्राहट गूँज रही थी। अचानक आर्यन के पीछे खड़ा सिपाही विक्रम ज़ोर से चिल्लाया। सबने पलटकर देखा तो वह गायब था। उसकी टॉर्च ज़मीन पर पड़ी थी और मिट्टी पर किसी को घसीटकर ले जाने के निशान दिखाई दे रहे थे। पूरी टीम उन निशानों का पीछा करती हुई जंगल के और भीतर पहुँची, जहाँ वर्षों से बंद पड़ी वही रहस्यमयी हवेली खड़ी थी। हवेली का विशाल दरवाज़ा अपने-आप चरमराता हुआ खुल गया। अंदर घना अंधेरा था, टूटी हुई दीवारें थीं और हर तरफ धूल जमी हुई थी। तभी ऊपर की मंज़िल से किसी के धीरे-धीरे चलने की आवाज़ आई... आर्यन ने अपनी बंदूक मज़बूती से पकड़ ली और सीढ़ियों की ओर कदम बढ़ाए। उसे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि अगले कुछ मिनटों में वह जिस सच से सामना करने वाला है, वह उसकी अब तक की ज़िंदगी का सबसे खौफ़नाक रहस्य बनने वाला था। आर्यन और उसकी टीम सावधानी से टूटी हुई सीढ़ियाँ चढ़ने लगे। हवेली के भीतर ऐसा सन्नाटा था कि हर कदम की आवाज़ दीवारों से टकराकर कई गुना लौट रही थी। ऊपर पहुँचते ही एक लंबा गलियारा दिखाई दिया। जिसके दोनों ओर पुराने कमरों के दरवाज़े आधे खुले थे। तभी गलियारे के आख़िरी सिरे पर सफेद कपड़ों में कोई आकृति खड़ी दिखाई दी। आर्यन ने टॉर्च की रोशनी उसकी ओर डाली, लेकिन अगले ही पल वह आकृति हवा में घुलती हुई गायब हो गई। तभी पीछे से एक ज़ोरदार धमाका हुआ। सीढ़ियों का दरवाज़ा बंद हो चुका था। पूरी टीम हवेली के भीतर फँस चुकी थी। उसी समय हवेली की दीवारों में लगे पुराने स्पीकरों से वही खुरदुरी आवाज़ गूँज उठी—"जो सच खोजने आता है... वह ज़िंदा वापस नहीं जाता।" आवाज़ खत्म होते ही चारों ओर धुआँ फैलने लगा। आर्यन समझ गया कि यह किसी इंसान की सोची-समझी योजना है। उसने धुएँ के बीच आगे बढ़ते हुए एक कमरे का दरवाज़ा तोड़ा। अंदर दीवारों पर दर्जनों तस्वीरें लगी थीं। वे सभी लोग उन्हीं लोगों की थीं जो पिछले महीनों में लापता हुए थे। कमरे के बीचों-बीच एक बड़ी मेज़ पर गाँव का नक्शा रखा था, जिसमें अगला निशाना लाल रंग से घेरा गया था। वह जगह थी......""ठाकुर वीरेंद्र प्रताप की हवेली। आर्यन तुरंत वहाँ पहुँचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हवेली के आँगन में ठाकुर वीरेंद्र खून से लथपथ पड़ा था। मरने से पहले उसने काँपते हुए कहा, "मैंने... पच्चीस साल पहले... एक निर्दोष परिवार को जलाने में साथ दिया था। हम पाँच लोग थे... बाकी सब मर चुके हैं... अब मेरी बारी थी... लेकिन जिसने यह सब किया... वह कोई भूत नहीं..." उसकी साँस टूटने लगी। उसने आख़िरी बार आर्यन की ओर देखा और बमुश्किल एक नाम लिया—"विक्रम..." आर्यन के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। विक्रम, जो उसका सबसे भरोसेमंद साथी था और जिसे सब मृत या लापता समझ रहे थे, वही इस पूरी साज़िश के पीछे था। अचानक चारों ओर गोलियों की आवाज़ गूँज उठी। काले कपड़ों और लोहे के पंजों वाला नकाबपोश सामने आ गया। उसने अपना मुखौटा उतारा। वह सचमुच विक्रम था। उसकी आँखों में वर्षों का गुस्सा जल रहा था। उसने कहा, "जिस परिवार को तुम हादसा समझते रहे... वह मेरा परिवार था। उस रात मैं छोटा था, इसलिए बच गया। मैंने कसम खाई थी कि एक-एक दोषी को उसी डर से मारूँगा, जो उन्होंने मेरे अपनों को दिया था। मैंने हैवान का चेहरा बनाया... ताकि हर अपराधी अपने ही डर से मरने लगे।" आर्यन ने शांत स्वर में कहा, "उन्होंने अपराध किया था, लेकिन कानून उन्हें सज़ा देता... तुम्हें नहीं।" विक्रम कड़वी हँसी हँसा। "कानून? पच्चीस साल तक कानून कहाँ था? जब पैसे और ताकत ने सच को दफना दिया था, तब न्याय कौन लाता?" दोनों के बीच ज़बरदस्त मुठभेड़ शुरू हो गई। हवेली गोलियों और धमाकों से गूँज उठी। आखिरकार विक्रम घायल होकर गिर पड़ा। मरने से पहले उसने कहा, "याद रखना, आर्यन... हर इंसान के अंदर एक हैवान छिपा होता है। फ़र्क सिर्फ इतना है कि कोई उसे रोक लेता है... और कोई उसे आज़ाद कर देता है।" विक्रम की मौत के साथ मामला खत्म हो गया। पुलिस ने वर्षों पुरानी साज़िश का सच दुनिया के सामने ला दिया। गाँव वालों ने राहत की साँस ली। लोगों ने सोचा कि अब "हैवान" हमेशा के लिए खत्म हो चुका है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। कुछ महीनों बाद आर्यन उसी जंगल से गुजर रहा था। उसकी नज़र अचानक उस पुराने बरगद पर पड़ी। पेड़ की छाल पर चार ताज़े पंजों के निशान उभरे हुए थे—बिल्कुल वैसे ही, जैसे पहली हत्या के बाद मिले थे। उसने झुककर उन्हें छूना चाहा, तभी पीछे से वही गुर्राहट सुनाई दी, जिसे वह कभी भूल नहीं पाया था। आर्यन पलटा... मगर वहाँ कोई नहीं था। सिर्फ़ हवा चल रही थी... और जंगल के अंधेरे में ऐसा महसूस हो रहा था, मानो कोई अदृश्य निगाहें अब भी उसे देख रही हों। उस दिन आर्यन को पहली बार एहसास हुआ कि विक्रम तो मर चुका था... लेकिन "हैवान" कभी किसी एक इंसान का नाम नहीं था। वह लालच, नफ़रत और बदले की वह आग थी, जो जब किसी के दिल में जन्म लेती है, तो एक और हैवान पैदा हो जाता है। समाप्त। स्टोरी कैसी लगी। कमेंट करके जरूर बताये। । श्वेता अग्रवाल 🔥🔥🔥✍️
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