यह कविता माँ की निश्छल और असीम ममता को समर्पित है। इसमें दर्शाया गया है कि कैसे एक माँ खुद कष्ट सहकर भी अपने बच्चे को पालती है और जीवन की हर राह में उसकी ढाल बनती है। माँ का आँचल और उसकी दुआएँ दुनिया के हर सुख और रिश्ते से बढ़कर सुकून देती हैं।
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