Mamta(maa)

ममता* _एक माँ के प्यार पर कविता_ ममता क्या है, पूछो उस बच्चे से, जिसकी हर खता पर, माँ ने सर झुका लिया। रातों को जाग कर, जिसने सपने सजाए, अपनी नींद भुला कर, उसको सुलाया। ममता वो है जो बिना कहे सब समझ जाए, आँख की नमी से, भूख पहचान जाए। खुद गीले में सो कर, बच्चे को सूखे में सुलाए, रोटी का आखिरी टुकड़ा भी, हँस कर खिलाए। मंदिर नहीं देखा मैंने, पर माँ को देखा है, भगवान का रूप उसी में बसा देखा है। दर्द जब मुझे हुआ, लबों पर “माँ” ही आया, दुनिया का हर सुख उसके आँचल में पाया। ममता सौदा नहीं जो तोला जाए, न कोई कीमत जो बोली जाए। ये तो बस एहसास है, निश्छल और पवित्र, जिसमें बह कर हर रिश्ता सच्चा हो जाए। --- Bhumika Nagar दैनिक प्रतियोगिता


: Bhumika nagar
img

All Chapters