इंतक़ाम

तुने सोचा कि कुछ आँसुओं से मैं बिखर जाऊँगा, तेरी बेरुखी के अंधेरों में कहीं खो सा जाऊँगा। पर तुम ये भूल गये, टूटकर जो संभल जाता है वही एक दिन अपनी पहचान बना लेता है...।। तेरे हर झूठ को सच की किताब में लिखा जाएगा, हर किए हुए कर्म का हिसाब एक दिन लौट आएगा..।। मैंने खामोशियो को अपनी ताकत बनाया है....। अपने हर दर्द को जीत का रास्ता बनाया है...। अब ना तुझसे कोई शिकायत है, ना कोई गिला बाकी है, दिल में बस मंज़िल की एक चाह बाकी है। तेरे दिए हुए जख्म अब कमजोर नहीं करते, ये वो निशान हैं अब मेरी कहानी को अधूरा भी रहने देते..। जब साबने साथ छोड़ दिया था तब तनहाई ने मेरा हाथ थामा था....। जब दुनिया ने मुझे कमज़ोर समझकर ठुकराया था। तब मेरी हिम्मत ने ही मुझे फिर से उठाया था इंतकाम का मतलब सिर्फ किसी को गिराना नहीं होता, कभी-कभी खुद को इतना ऊपर उठाना होता है कि जिसने तुम्हें ठुकराया हो, वो तुम्हारी कामयाबी देखकर अपनी सोच पर पछताए। मैं अब इंसान वो पुराना नहीं रहा, जिसे तुम अपने शब्दों से तोड़ दिया करते थे। मेरे अंदर एक नई आग जन्म ले चुकी है, जो हर अंधेरे को रोशनी में बदलना जानती है। याद रखना, मेरी खामोशी तूफान से पहले का सन्नाटा है, मेरी हार सिर्फ मेरी अगली जीत का रास्ता है। मैं बदला लेने नहीं, अपना मुकाम बनाने निकला हूँ, और यही मेरा सबसे बड़ा इंतकाम होगा। एक दिन देगा वक्त गवाही मेरी कहानी की, मेरी मेहनत और मेरी कुर्बानी की। तब तुम्हारे पास कहने को शब्द नहीं होंगे, तब मेरे पास मेरे देखे हुए ख्वाब पूरे होंगे... क्योंकि मेरा इंतकाम नफरत से नहीं, मेरी कामयाबी की ऊँचाइयों से होगा। और जिस दिन मैं अपनी मंज़िल पा लूँगा, उस दिन मेरा हर आँसू मुस्कान में बदल जाएगा। प्रतियोगिता हेतु।।।।


: Komal
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