शादी की सातवीं सालगिरह पर अर्णव और अंकिता तलाक के अंतिम कागज़ात पर दस्तख़त करने अदालत पहुँचते हैं। लेकिन ऐन वक्त पर, सालों की यादें और छिपा हुआ प्यार उनके अहंकार पर भारी पड़ जाता है। कागज़ पर आँसू गिरते ही अंकिता रो पड़ती है, अर्णव उसे गले लगा लेता है और बिखरता हुआ आशियाना दोबारा जुड़ जाता है।
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