यह कहानी फौजी राज और उनकी पत्नी प्रियंका के त्याग की है। बर्फीली सरहद पर १२० जवानों की कंपनी के साथ लड़ते हुए, राज अपनी आखिरी रात फोन पर जल्दी घर आने का वादा करते हैं। प्वाइंट ४८१२ को जीतते हुए राज शहीद हो जाते हैं और तिरंगे में लिपटकर अपना वादा पूरा करते हैं।
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