नींद काम की थकान के बाद,सपनो से मिलाती है निशा में कभी अपनो का दीदार कराती है सुबह काम पर जाने का अहसास कराती है यह नींद मुझे अक्सर सूंदर सपने दिखाती है। जमाने की विडंबनाओ से विमुख हूं मैं मेरी नींद मुझे सुखद अहसास दिलाती है नींद ही तो है जो हर बुरे कर्म से बचाती है रात्रि के जाने पर कर्तव्य याद दिलाती है। माना जागृत अवस्था सबसे सुखद पल है , पर अकेले में नींद ना हो तो कहां कल है । कंकरीट के इस जंगल में नींद ही तो है, जो हर वक्त राह को निष्कंटक बनाती है। नींद ही मेरी चेतना है जो मुझे मार्ग दिखाती है आपाधापी के इस भवसागर की लहर बनती है फंस जाऊं कभी नादानी से बीच भँवर में तो बन पतवार मेरी मुझे किनारे पर लेकर आती है। विनोद महर्षि अप्रिय सीतसर 9772255022
© Copyright 2023 All Rights Reserved