स्वाभिमान सर्वोपरि

"प्रयागराज की गलियों से शुरू हुई एक आज़ाद पंछी जैसी लड़की की कहानी, जिसे प्यार के नाम पर सुनहरे पिंजरे में कैद किया गया। जब उसका भरोसा टूटा और अपनों ने ही पीठ में खंजर घोंपा, तो वह बेचारी बनकर नहीं रोई। ​ये कहानी है उस स्त्री की, जिसने कोर्टरूम के सन्नाटे में अपने स्वाभिमान की ऐसी दहाड़ मारी कि कानून के रखवाले भी दंग रह गए। विपक्षी वकील के पसीने छूट रहे गये और आरोपी अपनी नज़रें चुराने पर मजबूर हो गया। क्योंकि अब वह चुप नहीं रहने वाली थी। क्या एक टूटी हुई उम्मीद फिर से आसमान नाप पाएगी? क्या वह अपने विश्वासघात का हिसाब ले पाएगी?"

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Mega Story writing Contest 2026

: तृप्ति सिंह
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