लगे जो कोई अपना सा...

भीड़ में भी जब कोई तन्हा नहीं लगता, पराया सा ये जहाँ फिर पराया नहीं लगता, धड़कनें जब किसी की आहट पहचान लें, और खामोशियों को भी कोई ज़ुबान मिल जाए,

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कविता

लेखक : (ध्रुव तारा )Dr Sanjay Rathod
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