दस्तक खामोश लफ़्ज़ों की

वर्ष 1998 के लखनऊ की नवाबी अदब के बीच सुलगती दो माफियाओं की खूनी जंग और बदले की आग में जलती एक नृत्यांगना के बीच फँसा है अमानुल्लाह। वह एक निष्ठावान 'खुशनवीस' (कैलिग्राफर) है, जो अपनी कलम की ओट में शांति तलाश रहा है, लेकिन लालची सिस्टम और उसके भयानक अतीत की 'दस्तक' सब कुछ बदल देती है। श्रृंगार, रोमांस और गहरे अपराध से बुनी यह कहानी आपको बेहद पसंद आएगी।

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Time : 8 Hour

Romance and Suspense thriller

: तमन्ना
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