अधूरा सवेरा

यह कविता एक अधूरेपन और गहरे इंतज़ार को दर्शाती है। सुबह का नया सवेरा दुनिया में तो रोशनी लेकर आता है, लेकिन कवि के दिल में केवल पुरानी यादों का दर्द और अकेलापन जगाता है।

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कविता

: Madhu gole
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