पिता पिता वो छाँव हैं, जो धूप में सुकून देते हैं, अपने बच्चों के लिए हर दर्द खुद सह लेते हैं। उनकी खामोशी में भी प्यार नजर आता है, हर मुश्किल में उनका हाथ सहारा बन जाता है। खुद अधूरे सपनों को दिल में दबा लेते हैं, बच्चों की खुशियों में अपनी दुनिया बसा लेते हैं। कभी सख्त तो कभी बेहद नरम होते हैं, पिता ही घर के सबसे मजबूत धरम होते हैं। थके कदमों से भी मुस्कान सजाए रखते हैं, हर परेशानी को दिल में छुपाए रखते हैं। उनकी डाँट में भी गहरा अपनापन होता है, पिता का प्यार सबसे अनमोल धन होता है। बिना कहे हर जिम्मेदारी निभाते हैं, अपनी नींद छोड़ बच्चों के सपने सजाते हैं। घर की नींव भी हैं और आसमान भी, पिता से ही रोशन हर अरमान भी। उनके होने से हर राह आसान लगती है, पिता की दुआ हर वक्त साथ चलती है। भगवान का सबसे प्यारा उपहार होते हैं, पिता ही बच्चों की असली पहचान होते हैं। ✨ श्वेता अग्रवाल ✍️🌸
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