“चौखट” ✨ चौखट पर ठहरी हुई कुछ पुरानी यादें हैं, जिनमें छुपी अधूरी सी कई फरियादें हैं। यहीं से होकर सपनों ने उड़ान भरी थी, यहीं किसी अपने ने विदाई भी करी थी। चौखट ने हर आहट को चुपके से पहचाना, खुशियों का मौसम हो या दर्द पुराना। कभी माँ की पुकार यहाँ गूंजा करती थी, कभी शाम दीयों से सज जाया करती थी। इस चौखट ने बच्चों की शरारत देखी है, बूढ़ी आँखों में छुपी हसरत देखी है। कभी दुल्हन के पायल की छनकार सुनी, कभी वीरान रातों की खामोशी चुनी। बरसों से ये घर की रखवाली करती है, हर रिश्ते की कहानी संभाली रखती है। जो बाहर गए, वो लौट भी आए कई बार, चौखट ने खोला हमेशा अपना द्वार। ये सिर्फ लकड़ी या पत्थर नहीं होती, घर की आत्मा से जुड़ी डोर होती। चौखट पर रुककर वक्त भी सोचता है, घर आखिर क्यों इतना अपना लगता है। ✨ श्वेता अग्रवाल ✍️🌸🌸
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