राज मल्होत्रा अपने कमरे में बैठा हुआ उपन्यास पढ़ रहा था। रविवार का दिन होने के कारण आज वह छुट्टी पर था।राज एक पेशेवर राइटर और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में हिंदी का अध्यापक भी था। जितनी खुबसूरती से वह शब्दों से खेलता हुआ कहानियां लिखता था।ठीक उतनी ही वह खूबसूरत भी था। यही कारण था की उसकी खूबसूरती पर लड़कियां मर _मिटती थी। उसकी दो किताबें बेस्ट सेल की उपाधि पा चुकी थी। जिसके कारण, राज मल्होत्रा को सम्मान और पुरस्कार मिल चुका था। उसके पिता एक साधारण खेतिहर थे। मां निर्मला कुशल गृहिणी थी।बस, जिन्दगी आराम से गुजर रही थी। तभी राज की प्रेमिका माधुरी आई। जी हां, माधुरी ही वह लड़की थी। जिसे राज बहुत ही ज्यादा प्रेम करता था। माधुरी भी पेशे से प्रोफेसर थी। उसके पिता राजबलभ मल्होत्रा रिटायर शिक्षक थे। दोनों बहुत ही अच्छे पड़ोसी थे। "राज,तुम क्या कर रहे हो? चलो ना आज शाम को कहीं घूमने चलते है।"माधुरी उसके पास गई और बैठती हुई बोली। उसकी बातों को सुनकर राज ने एक बार देखा। फिर उपन्यास पढ़ते हुए कहा"आज मेरे पास वक्त नहीं है।तुम किसी और को लेकर चली जाओ।"अब तो इतना सुनने के बाद माधुरी नाराज हो गई और बोली"यह क्या! इस उपन्यास के कारण तुम मुझको अनदेखी कर रहे हो। जाओ, आज से मेरी और तुम्हारी आशिकी खत्म!" इतना कहकर वह उठने वाली थी। तभी राज ने उसका हाथ पकड़ा और अपनी तरह बैठाकर बोला"अरे मेरी जान। मेरी ग़ज़ल और शायरी! मैं तो तुमसे मजाक कर रहा था। तुम्हारे आगे यह उपन्यास क्या है?"इतना कहने के बाद राज ने उपन्यास को बगल में रखा और उसकी माथे को चूमा। माधुरी भी आंखें बंद कर ली। शायद वह भी राज की आशिकी को समझ चुकी थी।
© Copyright 2023 All Rights Reserved