Jai mata di

मैंया ऐसो जिया में समाय गयीं रे कि मैं तनमन की सुध बुध गंवा बैठी। हर आहट पे समझी लो आय गयीं रे झट पूजा की थाली सजा बैठी । मैंया के शीश पर लाल चुनरी सजे चुनरी की छवि लागे प्यारी-2 मैया के मांग में मांग टीका सजे टीके की chamak लगे प्यारी-2 देख चुनरी और टीका लजाय गयी रे झट थाली में दीपक सजा बैठी। मैंया के हाथ में स्वर्ण कंगन सजे कंगन की खनक लागे न्यारी-2 मैंया के पाँव में चाँदी पायल सजे पायल की छमक लागे न्यारी-2 देख कंगन और पायल बौराय गयी रे झट थाली में चंदन सजा बैठी । मैंया शेरो चढ़ी बड़ी लागे भली मैंया की ये छवि लागे प्यारी -2 उनके चरणों में मैं ध्यान अपने धरूं मैया पे जाऊं मैं वारी वारी-2 पाके उनकी कृपा पार पाय गयी रे कि मैं दुनिया की चिंता भुला बैठी । मैया …………………….

7 Views
Time : 3 Min

कविता

: KT
img