छल का साया (इश्क़ और फ़रेब की एक दास्तान)

कहते हैं इश्क़ में इंसान को सब कुछ धुंधला दिखाई देने लगता है—शायद इसलिए क्योंकि दिल की रोशनी इतनी तेज़ होती है कि दिमाग की बत्तियां गुल हो जाती हैं। राघव और मीरा की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी, जहाँ एक तरफ़ रूह की पाकीज़गी थी और दूसरी तरफ़ साज़िशों का बुना हुआ एक जाल।

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लघु कथा

लेखक : (ध्रुव तारा )Dr Sanjay Rathod
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