(ग़लती )“क्या औरत होना एक गलती है?” यह केवल एक सवाल नहीं, बल्कि उस समाज पर उठाया गया एक आईना है, जहाँ आज भी लड़की होने को कई बार बोझ, सीमा और कमज़ोरी के रूप में देखा जाता है।यह कहानी दिखाती है कि गलती किसी औरत के होने में नहीं, बल्कि उस सोच में है जो उसे बराबरी का हक नहीं देती। यह एक संघर्ष है खुद को स्वीकार करने का, अपनी पहचान बनाने का, और समाज की बनी-बनाई सीमाओं को तोड़ने का।
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