रात के करीब ग्यारह बजे थे। पूरा शहर तेज़ बारिश में भीग रहा था। बिजली की चमक और बादलों की गड़गड़ाहट माहौल को और डरावना बना रही थी। रिया अपनी छोटी-सी चाय की दुकान बंद करने ही वाली थी कि तभी एक लड़का पूरी तरह भीगा हुआ दुकान के सामने आकर रुका। “एक चाय मिल जाएगी?” उसने कांपती आवाज़ में पूछा। रिया ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा। चेहरे पर थकान थी… और आंखों में कोई गहरा दर्द। “इतनी रात को?” रिया ने हैरानी से पूछा। “बस… कहीं जाने की जगह नहीं है,” लड़के ने धीमे से कहा। रिया ने बिना कुछ बोले उसे अंदर बैठने दिया और गर्म चाय सामने रख दी। कुछ देर दोनों खामोश रहे। सिर्फ बारिश की बूंदों की आवाज़ सुनाई दे रही थी। अचानक लड़के की नजर दुकान में टंगी एक पुरानी तस्वीर पर पड़ी। उसकी आंखें फैल गईं। “ये तस्वीर… आपको कहां मिली?” उसने घबराकर पूछा। रिया मुस्कुराई, “ये मेरे पापा की है। वो पंद्रह साल पहले एक बरसात की रात में कहीं गायब हो गए थे।” लड़के के हाथ कांपने लगे। उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े। “उस रात… एक्सीडेंट मेरी वजह से हुआ था,” उसने टूटती आवाज़ में कहा। “मैं डर गया था… और भाग गया।” रिया जैसे पत्थर बन गई। बाहर बारिश और तेज़ हो चुकी थी। कुछ पल बाद लड़का उठकर जाने लगा, लेकिन रिया ने उसका हाथ पकड़ लिया। “इतने सालों से मैं अपने पापा से एक सवाल पूछना चाहती थी…” उसकी आंखें नम थीं, “क्या आखिरी वक्त में वो अकेले थे?” लड़के ने रोते हुए सिर हिलाया, “नहीं… मैंने उन्हें अस्पताल पहुंचाया था। आखिरी सांस तक उनके साथ था।” रिया की आंखों से आंसू बह निकले। उस बरसात की रात ने दो अजनबियों को नहीं… दो अधूरी कहानियों को मिला दिया था।
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