ममता वह महासागर है जिसकी गहराई को आज तक कोई माप नहीं पाया और वह आकाश है जिसकी व्यापकता का कोई अंत नहीं। यहाँ ममता के विभिन्न स्वरूपों को समेटती मेरी एक विस्तृत कविता प्रस्तुत है:
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