जो कार्य दबाव या नियम के कारण किया जाता है, वह बोझ बन जाता है। लेकिन जो कार्य स्वैच्छिक होता है, वही मनुष्य के चरित्र की असली पहचान कराता है और हृदय को परम संतोष देता है।
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