अपनी मर्जी का एक दीया...

सच्चा कर्म वही है जो किसी मजबूरी या आदेश से नहीं, बल्कि आपके भीतर की आवाज़ से उपजा हो।

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कविता

लेखक : (ध्रुव तारा )Dr Sanjay Rathod
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