गांव के किनारे बने छोटे से घर की छत पर हर रात एक लड़की बैठती थी आर्या। उसकी आदत थी आसमान को देर तक निहारना। लोग कहते, “ये पागल है… सितारों से बातें करती है।” लेकिन कोई नहीं जानता था कि आर्या ऐसा क्यों करती थी। दो साल पहले उसके पिता इस दुनिया को छोड़ गए थे। जाते-जाते उन्होंने कहा था, “जब भी मेरी याद आए, रात के आसमान को देखना… मैं किसी सितारे में चमकता मिलूंगा।” उस दिन के बाद आर्या हर रात छत पर जाती और आसमान से बातें करती। “पापा… आज मेरा रिज़ल्ट आया।” “पापा… आज मां बहुत उदास थीं।” “पापा… मुझे डर लग रहा है।” और हर बार हवा का एक हल्का झोंका उसके चेहरे को छू जाता, जैसे कोई प्यार से सिर सहला रहा हो। एक रात गांव में तेज़ तूफान आया। बिजली चली गई। लोग घरों में बंद हो गए। लेकिन आर्या छत पर बैठी रही। उसकी मां घबराकर बोलीं, “नीचे आ जा बेटा! वहां खतरा है।” आर्या मुस्कुराई और आसमान की ओर देखकर बोली, “मां… आज पापा बहुत चमक रहे हैं। लगता है वो कहना चाहते हैं कि डरना मत।” उसी पल बादलों के बीच एक चमकता सितारा दिखाई दिया। तूफान धीरे-धीरे शांत होने लगा। मां की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने पहली बार महसूस किया कि कुछ रिश्ते मौत से खत्म नहीं होते… वे बस सितारों में बदल जाते हैं।
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