ख्वाहिश

यह कविता दिखाती है कि एक इंसान की असली 'ख्वाहिश' भौतिक सुखों में नहीं, बल्कि उन रास्तों और उन लोगों के काम आने में है जहाँ भावनाओं की कद्र हो।

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कविता

: अज्ञात
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