​ज़िंदगी: एक उपहार, बोझ नहीं..

"ज़िंदगी से प्यार करना सीखो"—यह वाक्य सुनने में जितना सरल है, जीने में उतना ही गहरा। अक्सर हम ज़िंदगी को तब प्यार करने का वादा करते हैं जब सब कुछ हमारी मर्ज़ी के मुताबिक चल रहा हो। लेकिन असल ज़िंदगी वह नहीं है जो सफलता के शिखर पर मुस्कुराती है, बल्कि वह है जो संघर्ष के रास्तों पर भी गुनगुनाना जानती है।

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लेख

: (ध्रुव तारा )Dr Sanjay Rathod
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